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Shiva Temple: शिव जी का अद्भुत मंदिर जहां पत्थरों से आती है डमरू की आवाज, जानें इसका इतिहास

Sawan 2025: देश में शिव जी के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं. एक मंदिर हिमाचल के सोलन जिले में स्थित है जहां पर पत्थरों को थपथपाने से शिवजी के डमरू की आवाज आती है.

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Shiva Temple: शिव जी का अद्भुत मंदिर जहां पत्थरों से आती है डमरू की आवाज, जानें इसका इतिहास

Jatoli Shiv Mandir

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Jatoli Shiv Mandir: भगवान शिव के देश में कई प्रसिद्ध धाम मौजूद हैं. शिव के कुछ ऐसे भी धाम हैं जो इतने रहस्यमयी हैं जिनके बारे में सुनकर ही आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. इसके साथ ही शिव के कुछ ऐसे धाम भी हैं जिनके चमत्कार के सामने विज्ञान भी नतमस्तक हो जाता है. भारत में 'देव भूमि' के नाम से मशहूर और बर्फीले पहाड़ों का प्रांत कहकर संबोधित होने वाले हिमाचल प्रदेश में एक ऐसा ही शिव मंदिर है जो रहस्यों से भरा पड़ा है. भगवान शिव के इस मंदिर में पत्थर से डमरू की आवाज आती है.

जटोली शिव मंदिर

यह मंदिर हिमाचल के सोलन जिले में स्थित है. शिव मंदिर की स्थापना आज के समय में की गई है और इसे बनाने में 39 साल लग गए. इस शिव मंदिर के रहस्यों के बारे में आप जानेंगे तो आप हैरान हो जाएंगे. दरअसल, इस शिव मंदिर को एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर कहा जाता है. यह मंदिर जटोली शिव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है. इस मंदिर के पत्थरों को जब आप थपथपाएंगे तो इससे डमरू की ध्वनि निकलेगी.

जटोली शिव मंदिर का इतिहास

इस मंदिर के निर्माण का संकल्प स्वामी कृष्णानंद परमहंस ने लिया था. उन्होंने 1950 में यहां सोलन की इस दुर्गम पहाड़ी पर शिव मंदिर के निर्माण का बीड़ा उठाया. 39 साल की कड़ी मेहनत के बाद इस मंदिर का निर्माण पूर्ण हुआ, इससे ठीक 6 साल पहले 1983 में ही स्वामी जी का निधन हो गया. फिर उनके शिष्यों ने स्वामी जी के अधूरे सपनों को साकार रूप दिया और इस मंदिर के निर्माण कार्य को पूर्णता प्रदान की.

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सोलन में पहाड़ की दुर्गम और सबसे ऊंची चोटी पर 111 फीट ऊंचा यह मंदिर एशिया के सबसे ऊंचे मंदिर का गौरव धारण किये हुए खड़ा है. यह मंदिर को दक्षिण भारतीय शैली में बनाया गया है, जो उत्तर से दक्षिण के एकीकरण को दर्शाता है. इस मंदिर के सबसे ऊंचे शिखर पर एक विशाल सोने का कलश है जो इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देता है. 

इस मंदिर की पौराणिक मान्यता है कि यहां भगवान शिव आए थे और उन्होंने कुछ समय के लिए यहां वास किया था. अभी तो आपको इस मंदिर के बारे में उतना ही पता चला जितना बताया गया, लेकिन इसी मंदिर के पास ही एक प्राचीन शिवलिंग भी लंबे समय से स्थापित है. यह मंदिर कभी भगवान शिव का विश्राम स्थल हुआ करता था. इसके साथ ही भगवान शिव की लंबी जटाओं के कारण इसका नाम जटोली मंदिर पड़ा है. जटोली शिव मंदिर के निर्माण के पूरा होने के बाद इसे दर्शनार्थियों के लिए साल 2013 में खोल दिया गया.

Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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