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किस श्राप की वजह से नहीं होती कलयुग में ब्रह्मा जी की पूजा, दुनिया में है सिर्फ एक ही मंदिर

भारत में कई करोड़ देवी देवता हैं. इनके देश ही नहीं दुनिया भर में कई मंदिर स्थित हैं, लेकिन सृष्टि के रचियता का सिर्फ 1 ही मंदिर है. उनकी पूजा अर्चना भी नहीं की जाती है.

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किस श्राप की वजह से नहीं होती कलयुग में ब्रह्मा जी की पूजा, दुनिया में है सिर्फ एक ही मंदिर
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हिंदू धर्म ग्रंथों की मानें तो पूरी सृष्टि की रचना निर्माण में ब्रह्मा जी की अहम भूमिका रही है. उनका नाम त्रिदेव ब्रह्मा, विष्ण और महेश में लिया जाता है. इसके बावजूद उनकी पूजा अर्चना नहीं की जाती है. दुनियाभर में उनका सिर्फ एक मंदिर है. बहुत से लोगों को नहीं पता है कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि कलयुग में ब्रह्मा जी की पूजा नहीं की जाती है. उन्हें किससे यह श्राप मिला और क्यों. आइए जानते हैं क्यों नहीं की जाती है ब्रह्मा जी की पूजा...

सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी को मिला था ये श्राप

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, पूरी सृष्टि की रचना ब्रह्मा विष्णु और महेश ने की थी. यही वजह है कि ब्रह्मा जी को सृष्टि का रचियता कहा जाता है, लेकिन इसके बावजूद इनकी पूजा नहीं की जाती. इसकी वजह उन्हें भगवान शिव से मिला एक श्राप है. यह श्राप ब्रह्मा जी को भगवान शिव के सामने झूठ बोलने पर मिला था. तभी से ब्रह्मा जी की पूजा नहीं की जाती है. किसी भी हवन से लेकर शुभ कार्यों में उनका नाम नहीं लिया जाता है. 

श्राप के पीछे था ब्रह्मा जी और विष्णु के बीच का विवाद

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु के बीच इस बात को लेकर विवाद हुआ कि आखिर दोनों में सबसे बड़ा और शक्तिशाली कौन है. दोनों ही अपने आपको बड़ा व शक्तिशाली बता रहे थे. इस पर दोनों ही भगवान शिव के पास अपनी समस्या को लेकर पहुंचे. 

शिवजी ने बताया उपाय

भगवान शिव एक ज्योतिषतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए. उन्होंने कहा कि जो भी दस ज्योतिर्लिंग का आदि या अंत सबसे पहले ढूंढ लेगा. वहीं सबसे श्रेष्ठ माना जाएगा. इस पर भगवान विष्णु ने वराह का रूप धारण किया. वहीं ब्रह्मा जी हंस का रूप धारण कर ज्योतिर्लिंग का आदि ढूंढने के प्रयास में जूट गये. उन्होंने कई दिनों तक प्रयास किया. इसके बाद भगवान विष्णु ने महादेव से आकर क्षमा मांगी और कहा कि उन्हें ज्योतिर्लिंग का अंत नहीं मिला. 

ब्रह्मा जी ने यहां बोला झूठ

ब्रह्मा जी ​भगवान शिव के समक्ष पहुंचे और उन्होंने कहा कि उन्हें ज्योतिर्लिंग का अंत मिल गया है. भगवान शिव ने जब उन्हें कहा कि आप झूठ बोल रहे हैं तो ब्रह्मा जी ने खुद को सही साबित करने के लिए केतकी के फूल को गवाह के रूप में साक्षी बनाया और झूठ बुलवाया. इस बात से महादेव नाराज हो गये. उन्होंने ब्रह्मा को श्राप दिया कि कभी उनकी पूजा नहीं की जाएगी और न ही वह किसी यज्ञ में भाग लेंगे. इसके साथ ही भगवान शिव केतकी केक फूल को भी श्राप दिया कि उनकी पूजा अर्चना में कभी भी केतकी का फूल अर्पित नहीं किया जाएगा. यही वजह है कि उसी के बाद ब्रह्मा जी की पूजा अर्चना नहीं की जाती है. 

यहां है ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर

हिंदू धर्म के देवी देवताओं के मंदिर देश ही नहीं बल्कि दुनिया में भी कई जगहों पर स्थित है. यहां उनकी पूजा अर्चना की जाती है. ब्रह्मा जी को झूठ बोलने की वजह से मिले श्राप के चलते उनकी पूजा अर्चना नहीं की जाती है. उनका दुनिया भर में राजस्थान के पुष्कर में सिर्फ एक ही मंदिर स्थित है. 

Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.)  

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