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Sphatik Mala: स्फटिक की माला से तुंरत मिलती है सिद्धि, इस उपरत्न को कहा जाता है मणि, होता है भगवान का वास

Sphatik Mala: ज्योतिष शास्त्रों में स्फटिक की माला को बेहद लाभदायक माना जाता है, यहां जानिए इससे जुड़ी कुछ खास बातें

Sphatik Mala: स्फटिक की माला से तुंरत मिलती है सिद्धि, इस उपरत्न को कहा जाता है मणि, होता है भगवान का वास

स्फटिक की माला से तुंरत मिलती है सिद्धि, इस उपरत्न को कहा जाता है मणि

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डीएनए हिंदीः Sphatik Mala Spiritual Significance Health Benefits- ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों से संबंधित दोषों को दूर करने के लिए कई तरह के उपाय बताए गए हैं. इन्हीं में से कुछ उपाय विभिन्न रत्नों की माला के जाप और उसे धारण करने से जुड़े हैं. लेकिन आज हम आपको बताने वाले हैं स्फटिक उपरत्न के बारे में जिसे शास्त्रों में मणि की संज्ञा दी गई है. मान्यता है कि इस उपरत्न (Crystal Rosary) में भगवान का वास होता है. इसकी पूजा अर्चना का विशेष महत्व बताया गया है. इतना ही नहीं यह (Sphatik Garland) उपरत्न सेहत के लिए भी वरदान है. यह शरीर में खून को बैलेंस रखता है और मानसिक शांति देता है. इसके अलावा आध्यात्मिक दृष्टि से स्फटिक की माला का जप करने से सिद्धियों की प्राप्ति हाेती है. चलिए जानते हैं स्फटिक माला से जुड़ी कुछ खास बातें.

स्फटिक की विशेषता (Sphatik Mala Specialty)

स्फटिक को कांचमणि, बिल्लौर, बर्फ का पत्थर, शुक्र रत्न और अंग्रेजी में इसे रॉक क्रिस्टल भी कहा जाता है. इसे हीरे का उपरत्न माना गया है. स्फटिक पहाड़ों पर बर्फ के नीचे छोटे−छोटे टुकड़ों के रूप में मिलता है, जो कि बर्फ के समान पारदर्शी पन लिये सफेद रंग का होता है. उपरत्न होते हुए भी स्फटिक का प्रभाव रत्नों से अधिक होता है. ऐसे में रत्नों से अधिक महत्वपूर्ण होने के कारण इसे मणि की संज्ञा दी गयी है. ज्यादातर स्फटिक पत्थर को काट−तराश कर विभिन्न प्रकार की माला, शिवलिंग, श्रीयंत्र, भगवान की मूर्तियां और लॉकेट आदि बनाया जाता है. जो कि कटिंग और पॉलिस के बाद बहुत ही आकर्षक दिखता है. मान्यता है कि इससे बनी मूर्तियों और शिवलिंग को विराजमान करने के लिए प्राण प्रतिष्ठा की जरूरत भी नहीं पड़ती है.

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स्फटिक का आध्यात्मिक महत्व (Sphatik Mala Spiritual Significance)

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार स्फटिक की माला बहुत शुद्ध और आध्यात्मिक होती है. मान्यता है कि स्फटिक की माला पर किसी भी मंत्र का जाप करने से वह मंत्र अति शीघ्र सिद्ध हो जाता है और यह असाधारण रूप से विशेष फलदायी और सर्वोत्तम माना जाता है. मान्यता है कि इस पर मां लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा और गायत्री माता के मंत्र का जाप करने से तुरंत सिद्धि की प्राप्ति होती है.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार स्फटिक की माला को धारण करने के लिए किसी तरह का बंधन नहीं है. कहा जाता है कि स्फटिक शिवलिंग व मेरू श्री यंत्र केे पूजा एवं दर्शन से ही सभी दुख दूर हो जाते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्र की दशा होने पर जो व्यक्ति हीरा नहीं पहन सकते उन्हें स्फटिक की 109 दाने की माला पहननी चाहिए. 

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सेहत के लिए लाभकारी स्फटिक (Health Benefits of Sphatik Mala)

स्फटिक पहाड़ों पर पाया जाता है इसलिए इसकी तासीर ठंडी होती है. मान्यता है कि इसकी माला धारण करने से अनेक प्रकार के शारीरिक और मानसिक कष्टों की समाप्ति होती है. ऐसे में गर्म स्वाभाव वाले या बात बात पर गुस्सा करने वाले व्यक्तियों के क्राेध काे शांत करके उन्हें असीम सुख का अनुभव कराती है. यह खून की गर्मी से होने वाले रोगों में भी अत्यंत लाभकारी होता है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.) 

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