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Ketu in Kundli: कुंडली के अंदर 8वें भाव में केतु के बैठने से चमकता है भाग्य, धन प्राप्ति के साथ बनेंगे सभी काम

कुंडली में कुछ भाव ऐसे भी हैं, जिनमें पापी ग्रह केतु या राहु के बैठने पर जीवन में अनुकूल और प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली के आठवें भाव में पाप ग्रह केतु का होना जीवन में कई प्रकार की अप्रत्याशित घटनाओं को लेकर आता है. 

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Ketu in Kundli: कुंडली के अंदर 8वें भाव में केतु के बैठने से चमकता है भाग्य, धन प्राप्ति के साथ बनेंगे सभी काम
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Ketu Kundali Effects: ग्रहों के गोचर से लेकर कुंडली में अलग अलग भाव में बैठने का प्रभाव जातक पर पड़ता है. यह व्यक्ति के जीवन को सरल और कठिन तक बना देते हैं. इसके अलावा पाप ग्रह की श्रेणी में आने वाली राहु केतु से ज्यादातर लोग घबराते हैं, लेकिन कुंडली में कुछ भाव ऐसे भी हैं, जिनमें पापी ग्रह केतु या राहु के बैठने पर जीवन में अनुकूल और प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली के आठवें भाव में पाप ग्रह केतु का होना जीवन में कई प्रकार की अप्रत्याशित घटनाओं को लेकर आता है. आइए जानते हैं कि कुंडली के आठवें भाव में केतु का क्या असर होता है... 

केतु ग्रह का क्या है स्वरूप

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, केतु को विरक्ति और त्याग का प्रतीक माना गया है. यह हमारी अंतरात्मा को भगवान से संबंध स्थापित करने वाला ग्रह है. यह ग्रह आठवें भाव में होने पर कई शुभ फल प्रदान करता है. इसमें व्यक्ति को सफलता और ज्ञान दोनों की प्राप्ति होती है. 

यह है कुंडली में आठवें भाव का महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में आठवां भाव समाधि, रहस्य, जीवन मृत्यु से लेकर पैतृक संपत्ति और वसीयत और असाध्य रोगों का कारक है. इसी भाव से अचानक धन प्राप्ति से लेकर गुप्त विद्याओं, ससुराल, और ज्योतिष का भी विचार किया जाता है.

भविष्य की घटनाओं का हो जाता है आभास

अष्टम भाव में केतु होने पर व्यक्ति में अद्भुत अंतर्ज्ञान होते हैं. इससे वह भविष्य में होने वाली घटनाओं का आभास पहले ही कर लेते हैं. ऐसा व्यक्ति रहस्यवादी और गूढ़ विषयों की ओर आकर्षित होते हैं. 

अघोरी और सिद्धि 

अष्टम भाव में कुत के होने पर व्यक्ति अघोरी या फकीर की तरह जीवन जीता है. उसका मोह माया से मन दूर होने लगता है. इन पर धर्म और तपस्या का प्रभाव पड़ता है. 

धन प्राप्ति के बनते हैं योग

अगर अष्टम भाव में केतु, शुक्र और गुरु एकादश भाव या चतुर्थ भाव में बैठते हैं तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति को धन प्राप्ति के योग बनते हैं. व्यक्ति को संपत्ति की प्राप्ति हो सकती है. अचानक धन के योग बनते हैं, जिससे व्यक्ति का जीवन ही बदल जाता है. 

बीमारी का मिलता है संकेत

अष्टम भाव में केतु का होना आपकी सेहत के लिए अच्छा नहीं होता है. यह किसी गंभीर बीमारी या सर्जरी की तरफ इशारा करता है. इसके अलावा यह कमर से नीचे के रोगों का बढ़ावा देता है. यह किसी बड़े घाव की वजह बन सकता है.

Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.)  

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