धर्म
Kawad Yatra 2025: श्रावण माह में भगवान भोलेनाथ जी की पूजा अर्चना की जाती है, इस दौरान भक्त कांवड़ यात्रा लेकर निकलते हैं. आइए जानते हैं क्या है यात्रा की पहली और अंतिम तिथि...
Kawad Yatra 2025- सावन का महीना अब कुछ ही दिनों में शुरू हो जाएगा, हिंदू धर्म में सावन का महीना सभी 12 महीनों में सभी पवित्र महीना माना जाता है. बता दें कि श्रावण माह का यह महीना हिंदू कैलेंडर के अनुसार पांचवा महीना होता जो भोलेनाथ को समर्पित है, जिसमें शिव जी की पूजा अर्चना की जाती है. इस दौरान भक्त कांवड़ यात्रा लेकर निकलते हैं और दूर-दूर से जल लाकर भगवान भोलनाथ को का चढ़ाते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं इस बार कब से शुरू हो रही है कांवड़ यात्रा, कब है आखिरी तारीख?
कब से शुरू होगी कांवड़ यात्रा
सावन की शुरुआत के साथ ही कांवड़ यात्रा शुरू हो जाती है. इस बार सावन की शुरूआत 11 जुलाई शुक्रवार से हो रही है, उसी दिन से कांवड़िए भगवान शिव की भक्ति में झूमते हुए कांवड़ यात्रा पर निकलेंगे. पंचांग के अनुसार, ये यात्रा श्रवण कृष्ण प्रतिपदा यानी 11 जुलाई को तड़के 2:06 बजे शुरू हो जाएगी.
बता दें कि श्रवण कृष्ण प्रतिपदा तिथि अगले दिन 02:08 तक चलेगी. ऐसे में 11 जुलाई से कांवड़िए भोलेनाथ की भक्ति में झूमते हुए यात्रा शुरू कर सकेंगे.
कब है अंतिम तारीख, कब तक चलेगी यात्रा?
हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन कृष्ण चतुर्दशी को यह यात्रा समाप्त होगी, यानी इस बार की कांवड़ यात्रा पूरे 13 दिन चलेगी. हालांकि, कुछ लोग पूरे सावन महीने में कांवड़ यात्रा पर रहते हैं पर आमतौर पर ज्यादातर लोग शिवरात्रि के खास दिन पर ही जलाभिषेक करते हैं और अपनी यात्रा को विराम देते हैं.
इसलिए कावड़िए इस दिन का अलग ही इंतजार करते हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार ये तिथि 11 जुलाई से शुरू होगी और 23 जुलाई शिवरात्रि के दिन खत्म होगी... वहीं सावन समाप्त होगा 9 अगस्त तक, कुछ भक्त कांवड़ सावन के अंतिम दिन तक कांवड़ यात्रा पर रहते हैं.
प्रमुख कांवड़ यात्रा रूट्स
कांवड़ यात्रा में कई प्रमुख रास्ते शामिल हैं और इनमें प्रमुख हैं हरिद्वार, गौमुख और गंगोत्री. यहां से भक्त पवित्र गंगा जल लेकर अलग-अलग शिव मंदिरों की ओर रवाना होते हैं और पहुंचकर जल चढ़ाते हैं. बता दें की हरिद्वार वाला रास्ता सबसे लोकप्रिय है, जिसमें श्रद्धालु हरिद्वार से ऋषिकेश के नीलकंठ महादेव मंदिर या फिर उत्तर प्रदेश के बागपत में स्थित पूरा महादेव मंदिर तक यात्रा करते हैं और मंदिर पहुंचकर जल चढ़ाते हैं.
इसके अलावा कुछ भक्त गौमुख जाकर वहां से गंगाजल लेते हैं और फिर अपने मान्यता अनुसार किसी शिव मंदिर तक यात्रा करते हैं. वहीं गंगोत्री से भक्त गंगाजल लेकर वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर या झारखंड के देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम तक यात्रा करते हैं. इसी तरह, देश में कई जगहें हैं जहां से लोग गंगाजल लेकर अपने-अपने शिव मंदिरों तक जाते हैं और वहां शिवलिंग पर जल चढ़ाकर अपनी यात्रा समाप्त करते हैं.
(Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और लोक मान्यताओं और नियमों पर आधारित है. डीएनए इसकी पुष्टी नही करता है.)
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