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Kanwar Yatra 2025: कांवड़ यात्रा के बीच कांवड़ियें क्यों नहीं लेते एक दूसरे का नाम, जानें इसकी वजह और महत्व

अगर भगवान शिव का पूजन किया जाए तो वह प्रसन्न होकर भक्तों की सभी इच्छाओं को पूर्ण करते हैं.महादेव को प्रसन्न करने के लिए सावन के महीने में शिव भक्त कांवड़ में पवित्र गंगा जल लेकर आते हैं. 

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Kanwar Yatra 2025: कांवड़ यात्रा के बीच कांवड़ियें क्यों नहीं लेते एक दूसरे का नाम, जानें इसकी वजह और महत्व
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सावन के महीने की शुरुआत हो चुकी है. इस महीने को बेहद विशेष माना गया है. इसमें भगवान शिव के भक्त उनकी पूजा अर्चना करने के साथ ही कांवड़ लेकर आते हैं. यहां से जल लाकर महादेव का जलाभिषेक करते हैं. मान्यता है कि अगर भगवान शिव का पूजन किया जाए तो वह प्रसन्न होकर भक्तों की सभी इच्छाओं को पूर्ण करते हैं. महादेव को प्रसन्न करने के लिए सावन के महीने में शिव भक्त कांवड़ में पवित्र गंगा जल लेकर आते हैं. इससे शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं, लेकिन इस दौरान कांवड़ियें एक दूसरे का नाम नहीं लेते हैं. आइए जानते हैं इसकी वजह 

सावन माह के साथ शुरू हुई कांवड़ यात्रा

सावन महीने के साथ ही कांवड़ यात्रा की शुरुआत हो चुकी है. शिवभक्त सावन के महीने में पवित्र नदी का जल लेकर अपने घर लौटते हैं. इससे पहले वे शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं. इससे भगवान अपने भक्त की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं. कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़िए 150 से 200 किलोमीटर तक की पैदल यात्रा करते हैं. इसमें गंगाजल लाकर भगवान शिव पर अर्पित करते हैं. इस दौरान कांवड़िये एक दूसरे का नाम नहीं लेते हैं. 

कांवड़िए क्यों नहीं लेते एक दूसरे का नाम

कांवड़ यात्रा के लिए महिला से लेकर पुरुष और बच्चे तक शामिल होते हैं, लेकिन इसमें कांवड़ लाने वाले भगवान शिव के भक्त एक दूसरे का नाम नहीं लेते हैं. यह ज्यादातर लोगों ने सुना और देखा होगा. ​कांवड़िये एक दूसरे को भोला या भोली कहकर पुकारते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है. कांवड़ यात्रा के बीच कांवड़िये एक दूसरे का नाम क्यों नहीं लेते हैं. आइए जानते हैं. 

इसलिए नहीं लिया जाता नाम

कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़िए सिर्फ यात्री नहीं होते. वे शिवभक्त होते हैं और शिव की भक्ति में डूबे होते हैं. वहीं कांवड़ यात्रा को सिर्फ एक आस्था ही नहीं बल्कि साधना माना जाता है. इसलिए कोई किसी का नाम नहीं लेता. भोला या भोली बोलते हैं. कांवड़ियां कांवड़ यात्रा लाने तक केवल शिव का साधक होता है. इस यात्रा के दौरान न कोई छोटा होता है और न कोई बड़ा, सभी शिव के भक्त होते हैं. वे उनकी साधना में लीन माने जाते हैं. 

Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और अंक ज्योतिष की गणनाओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टी नहीं करता है.

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