धर्म
कालाष्टमी पर काल भैरव की पूजा अर्चना के साथ ही व्रत रखा जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति के सभी पाप दोष नष्ट होने के साथ ही शत्रुओं से छुटकारा मिलता है.
पौष माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर कालाष्टमी का पूजन किया जाएगा. यह साल की आखिरी कालाष्टमी होगी. ऐसे में कई जातक इस दिन को लेकर असमंजस में हैं, लेकिन इसका उत्तर वैद्रिक पंचांग में उपलब्ध है, जिसके अनुसार कालाष्टमी 11 दिसंबर को मनाई जाएगी. पंचांग के अनुसार, गुरुवार के दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगी और राहुकाल का समय दोपहर 1 बजकर 32 मिनट से शुरू होकर 2 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. ऐसे में कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के भी योग बन रहे हैं.
हिंदू पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 11 दिसंबर दोपहर 1 बजकर 56 मिनट से शुरू होकर 12 दिसंबर दोपहर 2 बजकर 56 मिनट तक रहेगी. कालाष्टमी की पूजा शाम में होती है, इसलिए व्रत 11 दिसंबर को रखा जाएगा. कालाष्टमी का व्रत सप्तमी तिथि के दिन भी हो सकता है. हालांकि कालाष्टमी की व्रत और पूजा 11 दिसंबर 2025 को रखा जाएगा. इसकी वजह कालाष्टमी की पूजा शाम के समय किया जाना है.
कालाष्टमी का दिन भगवान काल भैरव को समर्पित है. इस दिन भगवान का पूजन करने मात्र से जातक के जीवन से भय, बाधा, और शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है. विशेषकर रात्रि में भैरव चालीसा, भैरव स्तोत्र, या ॐ कालभैरवाय नमः मंत्र का जाप करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है. भगवान काल भैरव को उड़द दाल, काले तिल, और मिठाई का भोग लगाएं. साथ ही कालाष्टमी के दिन, काले कुत्ते को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है, क्योंकि कुत्ता काल भैरव का वाहन है.
इसी के साथ ही इस तिथि पर मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भी है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस तिथि पर भगवान कृष्ण की पूजा करने से यश, कीर्ति, धन, ऐश्वर्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है. माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है.
Disclaimer: यह ज्योतिष की गणना और मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए इसकी जिम्मेदारी या पुष्टी नहीं करता है.
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