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जगन्नाथ रथ की रस्सी के अलग अलग होते हैं नाम, जानें क्यों इसे छूने के लिए क्यों भागते हैं लोग और आध्यात्मिक महत्व

Jagannath Rath Yatra 2025: जगन्नाथ भगवान समेत उनके भाई और बहन के रथ में लगी रस्सी के नाम भी अलग अलग हैं. इसे छूना आत्मिक रूप से समृद्ध होने का दुर्लभ अवसर माना जाता है. 

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जगन्नाथ रथ की रस्सी के अलग अलग होते हैं नाम, जानें क्यों इसे छूने के लिए क्यों भागते हैं लोग और आध्यात्मिक महत्व
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Jagannath Rath Yatra 2025: जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत आज से हो गई है. इसमें लाखों श्रद्धालु पहुंच गये हैं. लोग जगन्नाथ भगवान के रथ की रस्सी को पकड़ने के लिए दौड़ लगाते हैं. इसकी वजह इस रथ यात्रा में रस्सी का बड़ा महत्व होना है. जगन्नाथ भगवान समेत उनके भाई और बहन के रथ में लगी रस्सी के नाम भी अलग अलग हैं. इसे छूना आत्मिक रूप से समृद्ध होने का दुर्लभ अवसर माना जाता है. इस रस्सी को छूने मात्र से भगवान जगन्नाथ की कृपा प्राप्त होती है. इसे छूने या खींचने भर से ​न सिर्फ पापों से मुक्ति मिलती है. जीवन में सुख समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं भगवान जगन्नाथ की रस्सी के नाम और इन्हें छूने का महत्व...

भगवान जगन्नाथ के रथों की रस्सियों के हैं अलग अलग नाम

भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के रथों को खिंचने के लिए अलग अलग रस्सियां लगाई गई हैं. इन रस्सियों को छूने भर से पाप नष्ट हो जाते हैं. यही वजह है कि लोग रथों की रस्सी को पकड़ने के लिए भागते हैं. इन रस्सियों के नाम भी अलग अलग हैं. इनमें भगवान जगन्नाथ के 16 पहियों वाले नंदीघोष रथ की रस्सी को शंखचूड़ा नाड़ी कहा जाता है. वहीं बलभद्र के 14 पहियों वाले तालध्वज रथ की रस्सी का नाम वासुकी है. जगन्नाथ भगवान की बहन सुभद्रा के 12 पहियों वाले पद्मध्वज रथ की रस्सी को स्वर्णचूड़ा नाड़ी कहा जाता है. ये रस्सियों भगवान के रथों को सिर्फ खींचती भर नहीं है, बल्कि धार्मिक दृष्टि से ये अत्यंत शुभ और पवित्र मानी जाती हैं. 

रथ की रस्सी को छू सकते हैं ये लोग

जगन्नाथ रथ यात्रा के बीच रस्सी छूने के लिए लोग भागते हैं. यह सबसे विशेष होता है. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल होता है कि रथ की रस्सी को कौन छू सकता है. आपको बता दें कि रस्सी को हर श्रद्धालु छू सकता है. इसमें न तो किसी धर्म, जाति या वर्ग का भेद होता है. न ही कोई सीमित प्रवेश होता है, जो भी भक्त आस्था और भक्ति भाव के साथ पुरी आता है, वह भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने वाली रस्सी को पकड़ सकता है.

भगवान की सेवा के समान मिलता है फल

मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में शामिल तीनों रथों में से किसी की भी रस्सी को छूने या खींचने पर भगवान की सेवा का फल मिलता है. इसे बेहद अत्यंत पुण्यकारी कर्म हैं. इससे भक्तों को भगवान का विशेष आशीर्वाद मिलता है. इसी कारण हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस अद्वितीय अवसर का हिस्सा बनने के लिए पुरी पहुंचते हैं.

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