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मानसिक या शारीरिक रूप से रहते हैं बीमार तो इन 3 शक्तिशाली मंत्रों का करें जाप, मिलेगी भगवान धन्वंतरि की कृपा

समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर निकले थे, जो अमरता का अमृत है. उन्हें देवताओं का दिव्य चिकित्सक (वैद्य) और भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. 

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मानसिक या शारीरिक रूप से रहते हैं बीमार तो इन 3 शक्तिशाली मंत्रों का करें जाप, मिलेगी भगवान धन्वंतरि की कृपा
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आज के समय में बहुत से लोग मानसिक या शारीरिक रूप से किसी न किसी बीमारी और समस्याओं से जूझ रहे हैं. इसके पीछे की वजह उल्टा सीधा खानपान, भगदौड़ और स्ट्रेस है. ऐसे में आप इस मंत्र का जाप कर बीमारियों को दूर कर हेल्दी रह सकते हैं. दरअसल हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और स्वास्थ्य का देवता माना जाता है. भक्ति के साथ उनके मंत्रों का जाप करने से बीमारियों को ठीक करने, भावनात्मक शक्ति को बढ़ाने और समग्र कल्याण लाने में मदद मिल सकती है.

शास्त्रों के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर निकले थे, जो अमरता का अमृत है. उन्हें देवताओं का दिव्य चिकित्सक (वैद्य) और भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. उन्हें अक्सर चार भुजाओं के दिखाया गया है. इसमें उनके हाथों में औषधीय जड़ी-बूटियाँ, शंख, चक्र और अमृत कलश होते हैं. उनकी पूजा करने से स्वास्थ्य, जीवन शक्ति और समृद्धि प्राप्त होती है. ऐसे में इन मंत्रों का जप करने से आपको लाभ होगा. 

1.धन्वंतरि का सरल और शक्तिशाली मंत्र

ओम धन्वंतरये नमः

इस मंत्र का जाप करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और भावनात्मक लचीलापन बढ़ता है-

2. धन्वंतरि स्वास्थ्य मंत्र - सुरक्षा और उपचार के लिए

ओम नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतरायः
अमृतकलश हस्ताय, सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय.
त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णु स्वरूप
श्री धन्वंतरि स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः ..

अर्थ: हे भगवान, जिन्हें सुदर्शन वासुदेव धन्वंतरि भी कहते हैं, जो अमृत कलश धारण करते हैं, जो सभी प्रकार के भय को दूर करते हैं, जो सभी रोगों का नाश करने वाले हैं, जो तीनों लोकों के स्वामी और पालनकर्ता हैं, और जो भगवान विष्णु के दिव्य रूप हैं - मैं आपको प्रणाम करता हूँ.

3. पवित्र धन्वंतरि स्तोत्र - उपचार का दिव्य भजन

ओम शंखम चक्रम जलौकम दधादामृतघटम चारुदोर्भिश्चतुर्मिह
सूक्ष्मस्वच्छतिहृद्यमशुका परिविलासनमौलिममभोजनेत्रम .
कलंबोदोज्ज्वलंगं कटिततविलासच्चरूपितांबराद्यम
वन्दे धन्वंतरिं तं निखिलगदावनप्रौधदावग्निलं ..

अर्थ: मैं भगवान धन्वंतरि को नमन करता हूँ, जो अपनी चार भुजाओं में शंख, चक्र, जोंक और अमृत कलश धारण करते हैं. वे उत्तम, शुद्ध वस्त्रों से सुशोभित हैं, उनका मुख कमल जैसा चमकीला है और उनका रूप काले बादल जैसा चमकीला है. वे अपनी कमर के चारों ओर सुंदर पीले रेशमी वस्त्र पहनते हैं और एक धधकती आग की तरह दिखते हैं जो सभी रोगों के जंगल को जला देती है. वे सभी बीमारियों से मुक्ति दिलाने वाले परम उपचारक और दिव्य रक्षक हैं.

इस शक्तिशाली स्तोत्र का जाप करने से स्वास्थ्य, धन और आध्यात्मिक सुरक्षा मिलती है. प्रतिदिन कम से कम 11 बार इस स्तोत्र का जाप करें.

Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.) 

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