धर्म
हिंदू धर्म (Hindu Dharm) में दान (Donation) करना बहुत ही पुण्य का काम (Work of charity) माना गया है लेकिन क्या आपको पता है कि आय का कितना हिस्सा परोपकार पर खर्च (Spending on Charity) करना चाहिए?
ऋग्वेद के अनुसार जो व्यक्ति गरीब और भूखे लोगों को भोजन कराता है उसे कई यज्ञ के समान फल मिलाता है और शत्रुओं से लेकर हर विघ्न और बाधाएं स्वत: ही दूर हो जाती है. दान कई पापों से छुटकारा पाने का साधन है. लेकिन कितना दान करना चाहिए ये आपकी आमदनी पर निर्भर करता है. तो चलिए जाने दान के 9 नियम क्या हैं.
दान के नियम
1. मनुष्य को ईमानदारी से कमाए गए धन का दसवां हिस्सा अच्छे कार्यों में दान करना चाहिए. जो व्यक्ति अपनी पत्नी, पुत्र या परिवार के अन्य सदस्यों को कष्ट पहुंचाकर दान देता है, उसका दान जीवन में और मृत्यु के बाद भी कष्टकारी होता है.
2. स्वप्रदत्त दान सर्वोत्तम और घर-गृहस्थी का दान मध्यम फलदायी होता है. गाय, ब्राह्मण तथा रोगी व्यक्ति को कुछ दिया जाता है, उस समय यदि कोई हमें न देने की सलाह देता है तो कष्ट उठाना पड़ता है.
3. तिल, कुश, जल और चावल का दान हाथ में लेकर करना चाहिए, अन्यथा उस दान पर राक्षस कब्जा कर लेते हैं. पितरों को तिल और देवताओं को चावल से दान दें. जल और कुश का संबंध सर्वत्र कायम रहना चाहिए.
4. दान देने वाले को पूर्व दिशा की ओर मुख करके भिक्षा देनी चाहिए और लेने वाले को उत्तर दिशा की ओर मुख करके भिक्षा स्वीकार करनी चाहिए, इससे दान देने वाले की आयु बढ़ती है और लेने वाले की आयु कम नहीं होती.
5. भोजन, जल, घोड़ा, गाय, वस्त्र, शय्या, छाता और आसन नामक 8 वस्तुओं का दान मृत्यु के बाद होने वाले कष्टों को दूर करता है.
6. गाय, घर, वस्त्र, शय्या और कन्या का दान एक ही व्यक्ति को करना चाहिए. रोगी की सेवा करना, देवताओं की पूजा करना, ब्राह्मणों के पैर धोना गाय दान करने के समान है.
7. गरीबों, अंधों, निराश्रितों, अनाथों, मूकों, कमजोरों, अपंगों और बीमारों की सेवा के लिए दिया गया धन पुणे में जुड़ जाता है.
8. अयोग्य ब्राह्मण से दान न लें.
9. गाय, सोना, चांदी, रत्न, विद्या, तिल, कन्या, हाथी, घोड़ा, शय्या, वस्त्र, भूमि, अन्न, दूध, छाता और आवश्यक सामग्री सहित घर- इन 16 वस्तुओं का दान करना महादान कहलाता है.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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