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Chaitra Navratri 2025: कैसे बना देवी दुर्गा का वाहन शेर? इसके पीछे पौराणिक कथा क्या है?

देवी दुर्गा के कई रूप हैं, लेकिन अपने सबसे लोकप्रिय रूप में वह शेर की सवारी करती नजर आती हैं. लेकिन शेर उनका वाहन कैसे बना? इसके पीछे पौराणिक कथा क्या है, चलिए जानें.

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Chaitra Navratri 2025: कैसे बना देवी दुर्गा का वाहन शेर? इसके पीछे पौराणिक कथा क्या है?

देवी दुर्गा की सवारी शेर कैसे बना?

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नवरात्रि के दौरान देवी के कई रूप देखने को मिलते हैं, जिनमें देवी दुर्गा की पूजा सबसे अधिक की जाती है. मां दुर्गा की छवि युद्ध के लिए तैयार एक देवी की है, जो अपने हाथों में तलवार, भाला, गदा, धनुष आदि हथियार धारण किए हुए हैं. ऐसी स्थिति में स्वाभाविक रूप से शेर उनका वाहन बन जाता है. लेकिन, शेर उनका वाहन कैसे बना, इसके बारे में भी एक कहानी है. 

जहां शेर जंगल का राजा है और शक्ति और आक्रामकता का प्रतीक है, वहीं मां दुर्गा भी शक्ति और ऊर्जा की प्रतीक हैं. उनके भक्त विभिन्न प्रकार की शक्तियां प्राप्त करने के लिए उनकी पूजा करते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसी कारण शेर उनका वाहन बन गया है. तो इसके पीछे एक नहीं बल्कि दो कहानियां हैं.  

सबसे प्रचलित कथा के अनुसार मां दुर्गा का वाहन शेर बनने के पीछे माता पार्वती की तपस्या की कहानी है. जब माता पार्वती भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या कर रही थीं, तब उनका शरीर काला और नीला हो गया था. एक दिन भगवान शिव ने मजाक में देवी को काली कह दिया, जिससे माता पार्वती क्रोधित हो गईं और अपना गोरा रंग वापस पाने के लिए तपस्या करने चली गईं.  
 
जब देवी पार्वती ने देखा कि तपस्या के दौरान उनके साथ एक शेर बैठा हुआ है, तो उन्होंने भगवान शिव से इस शेर को अपना वाहन बनाने का अनुरोध किया. भगवान प्रसन्न हुए और उन्हें यह वरदान दिया. तभी से देवी को मां शेरावाली कहा जाने लगा और उनका एक नाम दुर्गा भी पड़ा.  

सिंह माता का वाहन बनने की एक और कथा स्कंद पुराण में मिलती है. इसके अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय ने देवासुर संग्राम में न केवल तारकासुर का वध किया था, बल्कि सिंहमुखम और सुर्पदमन नामक उसके दो भाइयों को भी पराजित किया था. अपनी हार के बाद सिंहमुखम ने भगवान कार्तिकेय से क्षमा मांगी. भगवान कार्तिकेय इससे प्रसन्न हुए और उन्हें सिंह रूप में परिवर्तित कर मां दुर्गा का वाहन बनने का आशीर्वाद दिया.  
 
मां दुर्गा पार्वती का ही रूप हैं. हालांकि नवरात्रि के अवसर पर न केवल प्रत्येक देवी का स्वरूप अलग होता है, बल्कि उनके वाहन भी अलग-अलग होते हैं. देवी दुर्गा को शेर पर सवार देखा गया है. पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का नाम स्कंद है, इसलिए उन्हें स्कंद माता भी कहा जाता है, जिन्हें शेर पर सवार दिखाया गया है. लेकिन कई स्थानों पर देवी पार्वती को शेर पर सवार देखा जाता है. देवी कुष्मांडा और मां चंद्रघंटा का वाहन सिंह है, शैलपुत्री और महागौरी का वाहन बैल है, जबकि महिषासुर का वध करने वाली देवी कात्यायनी का वाहन सिंह है. 

Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है.  डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.  

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