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Holi 2022: इस त्योहार से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं और कहानियां, शिव और कृष्ण से भी संबंध

फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाए जाने वाले होली के त्योहार को फाल्गुनी भी कहा जाता है. पहले होली का नाम होलिका या होलाका था.

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Holi 2022: इस त्योहार से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं और कहानियां, शिव और कृष्ण से भी संबंध
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डीएनए हिंदी: होली का त्योहार पूरे भारत में बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है. किसी भी और त्योहार की ही तरह इस त्योहार से भी जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं और किवदंतियां प्रचलित हैं. भारत के अलग-अलग हिस्सों में होली मनाने की कई प्रथाएं भी प्रचलित हैं. लोक आस्था का यह त्योहार असल में बुराई पर अच्छाई और नई शुभ शुरुआत से जुड़ा है. 

पूतना के वध की कहानी भी होली से है जुड़ी
मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन पूतना नामक राक्षसी का वध किया था. इस खुशी में गांव वालों ने होली का त्योहार मनाया था. इसी पूर्णिमा को भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ रासलीला रचाई थी और दूसरे दिन रंग खेलने का उत्सव मनाया गया था. इसी दिन से नववर्ष की शुरुआत हो जाती है. पूतना वध की कथा को बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर देखा जाता है.

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होली का वर्णन भक्ति काल के कवियों ने किया
श्रीमद्भागवत महापुराण में होली के रास का वर्णन किया गया है. भक्ति काल के प्रमुख कवियों में से एक सूरदास ने बसंत और होली पर 78 पद लिखे हैं. पद्माकर और विद्यापति ने भी होली से जुड़े कई पद लिखे हैं. होली का संबंध भगवान शिव से भी जोड़ा जाता है. होली में रंग लगाकर, नाच-गाकर लोग भगवान शिव के गणों का वेश धारण करते है.

प्रह्लाद और होलिका की कहानी सबसे चर्चित 
होली के त्योहार के साथ भक्त प्रह्लाद और होलिका की कहानी सबसे ज्यादा चर्चित है. हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को आग से न जलने का वरदान था. उसने भगवान श्री हरि विष्णु के भक्त प्रह्लाद को अग्नि में जलाकर मारने की कोशिश की लेकिन होलिका जल गई और प्रह्लाद बच गए थे. तबसे होली का त्योहार मनाने की प्रथा चली आ रही है. इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर देखा जाता है.

 

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