धर्म
हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद शव का अंतिम संस्कार करने के साथ ही कई सारी क्रियाएं की जाती है. इन्हीं में से एक सबसे जरूरी कपाल क्रिया है. इसे न करने पर व्यक्ति को अगला जन्म लेने तक में परेशानी का सामना करना पड़ता है.
Hindu Tradition Kapal Kriya: हिंदू धर्म में व्यक्ति की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के दौरान कई सारे नियम और क्रियाओं का पालन किया जाता है. इनमें ज्यादातर क्रियाएं शव का दाह संस्कार करते समय की जाती है. इस दौरान शव को जला दिया जाता है. इसके बाद कपाल क्रिया की जाती है, लेकिन बहुत से लोग जानना चाहते हैं कि आखिर कपाल क्रिया क्यों की जाती है और कब की जाती है. इसकी वजह और चीजें सबसे पवित्र ग्रंथों में से एक गरुड़ पुराण में भी लिखा गया है. आइए जानते हैं क्या है कपाल क्रिया और इसे क्यों करना होता है सबसे जरूरी...
क्या होती है कपाल क्रिया?
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, हिंदू धर्म में जब भी मृतक का अग्नि संस्कार किया जाता है तो शव के जल जाने के बाद बांस की लकड़ी से उसके मस्तक पर वार किया जाता है. यह क्रिया खोपड़ी के टुकड़े करने के लिए की जाती है. कपाल क्रिया वही व्यक्ति करता है, जो शव को अग्नि देता है. गरुड़ पुराण में इसकी वजह और इसे बेहद जरूरी बताया गया है. इसके अनुसार बताया गया है कि शव के आधे या पूरे जल जाने के बाद मस्तक का भेदन करना चाहिए. इसमें गृहस्थ व्यक्ति का बांस की लकड़ी से और साधुओं का श्रीफल की लकड़ी से कपाल क्रिया की जाती है.
जानें क्यों की जाती है कपाल क्रिया
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, व्यक्ति के मस्तिष्क में स्मृति होती है. कपाल क्रिया के दौरान शव को मस्तिष्क को नष्ट कर दिया जाता है. ताकि अगले जन्म में इस जन्म की स्मृति न रहे. यह उसके अगले जन्म में बाधा न पहुंचाये. गरुड़ पुराण के अनुसार, कपाल क्रिया न करने से मृतक को अगला जन्म लेने में बाधाओं का सामना करना पड़ता है. उसे परेशानियां होती है. अगला जन्म होने पर व्यक्ति को पुरानी स्मृतियां बनी रहती हैं.
Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.)
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