धर्म
हरियाली तीज पर महिलाएं श्रृंगार में हरे रंग का विशेष रूप से इस्तेमाल करती हैं. इनमें हरे रंग कपड़ों से लेकर मेहंदी, चूड़ी और बिंदी शामिल है. साथ ही महिलाएं पैरों में आलता जरूर लगाती हैं.
हरियाली तीज शादीशुदा यानी सुहागिनों का बड़ा त्योहार है. इस बार हरियाली तीज 27 जुलाई 2025 को मनाई जाएगी. इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्ति के लिए निर्जला व्रत रखती है. साथ ही भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना करती है. हरियाली तीज पर महिलाएं श्रृंगार में हरे रंग का विशेष रूप से इस्तेमाल करती हैं. इनमें हरे रंग के कपड़ों से लेकर मेहंदी, चूड़ी और बिंदी शामिल है. साथ ही महिलाएं पैरों में आलता जरूर लगाती हैं. आइए जानते हैं कि इस दिन महिलाओं द्वारा हरे रंग की ही चीजों को धारण करना और आलता लगाने का क्या महत्व है...
महावर मां लक्ष्मी से जुड़ा है. इसे सिर्फ विवाहित महिलाएं ही नहीं, कुंआरी कन्याएं भी लगाती हैं. कुछ जगहों पर बेटी के जन्म के बाद गृह प्रवेश के समय या नवरात्रि पूजन में कुंवारी कन्याओं के पैरों में महावर लगाया जाता है. घर में इसकी छाप भी लगाई जाती है. इससे घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है.
महावर को घर की एक विशेष दिशा में बैठकर लगाना चाहिए. इसे गलती से भी दक्षिण दिशा में बैठकर नहीं लगाना चाहिए. इसके अलावा मंगलवार के दिन भी महावर नहीं लगाना चाहिए. इस दिन आलता लगवाना अशुभ माना जाता है. इसके अलावा अगर घर में किसी की मृत्यु होने पर भी इसे लगाने से परहेज करना चाहिए.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को हरियाली और प्रकृति बहुत ही प्रिय है. इसलिए भगवान शिव को समर्पित हरियाली तीज के दिन जो महिलाएं हरे रंग की चूड़ियां, साड़ी पहनती है, . उन्हें महादेव और मां पार्वती अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं. इनके वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है.
Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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