धर्म
अष्टमी हनुमान जी के अलावा मां संतोषी और लक्ष्मी माता की विधि-विधान से पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन पूजा करने और व्रत रखने से जातक के जीवन में चल रहे सभी कष्टों का नाश होता है.
हिंदू धर्म में पौष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को बेहद शुभ माना जाता है. इसे हनुमान अष्टमी कहा गया है. इस बार हनुमान अष्टमी शुक्रवार दोपहर 2 बजकर 56 मिनट तक रहेगी. इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी. इस दिन सूर्य वृश्चिक राशि में और चंद्रमा सुबह 10 बजकर 20 मिनट तक सिंह राशि में रहेंगे. ऐसे में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. वैसे तो यह त्योहार पूरे देश में ही धूमधाम से मनाया जाता है. लेकिन मध्यप्रदेश में इस त्योहार का विशेष पूजा अर्चना और व्रत किया जाता है. आइए जानते हैं हनुमान अष्टमी की तारीख से लेकर पूजा विधि और महत्व...
पौराणिक धर्म ग्रंथों के अनुसार, अष्टमी हनुमान जी के अलावा मां संतोषी और लक्ष्मी माता की विधि-विधान से पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन पूजा करने और व्रत रखने से जातक के जीवन में चल रहे सभी कष्टों का नाश होता है. इसके साथ ही माता रानी अपने भक्तों को सभी कष्टों से बचाती हैं. साथ ही उनकी जो भी मनोकामनाएं होती हैं, उन्हें भी पूर्ण करती हैं. वहीं, इस दिन व्रत शुक्र ग्रह को मजबूत करने और उससे संबंधित दोषों को दूर करने के लिए भी किया जाता है. इस व्रत को किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले शुक्रवार से शुरू किया जा सकता है. आमतौर पर यह व्रत लगातार 16 शुक्रवार तक रखा जाता है, जिसके बाद उद्यापन किया जाता है.
जो लोग इस दिन व्रत रखते हैं, वे दिन में एक बार मीठे के साथ किसी एक अनाज का सेवन कर सकते हैं. व्रत के दिन घर में तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) का सेवन घर के किसी सदस्य को भी नहीं करना चाहिए.
इस व्रत को करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. लाल कपड़े पर माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. दीप जलाएं और फूल, चंदन, अक्षत, कुमकुम और मिठाई का भोग लगाएं. 'श्री सूक्त' और 'कनकधारा स्तोत्र' का पाठ करें. मंत्र जप करें, 'ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' और 'विष्णुप्रियाय नमः' का जप भी लाभकारी है.
Disclaimer: यह ज्योतिष की गणना और मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए इसकी जिम्मेदारी या पुष्टी नहीं करता है.
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