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Guru Tegh Bahadur Jayanti 2023: बचपन के त्यागमल आखिर कैसे बनें गुरु तेग बहादुर, जानें सिखों के नौवें गुरु के अमूल्य विचार

Guru Tegh Bahadur Jayanti 2023: गुरु तेग बहादुर का जन्म वैशाख माह की कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि को हुआ था. साल 2023 में यह पर्व 21 अप्रैल को मनाया जाएगा.

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Guru Tegh Bahadur Jayanti 2023: बचपन के त्यागमल आखिर कैसे बनें गुरु तेग बहादुर, जानें सिखों के नौवें गुरु के अमूल्य विचार

Guru Tegh Bahadur Jayanti 2023

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डीएनए हिंदी: गुरु तेग बहादुर (Guru Tegh Bahadur) सिख समुदाय के नौवें गुरु थे. उन्होंने महज 14 वर्ष की आयु में ही अपने पिता हरगोबिंद सिंह के साथ मुगलों के खिलाफ जंग लड़ी थी. गुरु तेग बहादुर का जन्म (Guru Tegh Bahadur Jayanti 2023) पंचांग के अनुसार, वैशाख माह की कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि को हुआ था. साल 2023 में यह पर्व 21 अप्रैल को मनाया जाएगा. गुरु तेग बहादुर जी (Guru Tegh Bahadur Jayanti 2023) की बताई गई बातों को अपने जीवन में अपना कर सफल हो सकते हैं.

बहादुरी के कारण मिला नया नाम
गुरु तेग बहादुर जी (Guru Tegh Bahadur Jayanti 2023) के बचपन का नाम त्यागमल था. मुगलों के खिलाफ युद्ध में बहादुरी की वजह से उन्हें बाद में गुरु तेग बहादुर नाम दिया गया था. तेग बहादुर (Tegh Bahadur) का अर्थ तलवार का धनी होता है. वह हमेशा ही हिंदूओं को जबरन मुस्लिम बनाए जाने के खिलाफ रहे थे. उन्होंने मानवाधिकारों की रक्षा के लिए खुशी-खुशी अपने प्राण त्याग दिए थे. गुरु तेग बहादुर जी के बताएं गए विचार को मनोबल बढ़ाने और सही मार्ग पर जाने के लिए लोगों को जीवन में अपनाना चाहिए. तो चलिए गुरु तेग बहादुर (Guru Tegh Bahadur) जी की बताई पांच बातों के बारे में जानते हैं.

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गुरु तेग बहादुर जी की बताई खास बातें (Guru Tegh Bahadur Jayanti 2023)
1. गुरु तेग बहादुर जी का मानना था कि सज्जन व्यक्ति वह होता है जो किसी की भावना को ठेस नहीं पहुंचाता है. व्यक्ति को जाने-अनजाने किसी को भी आहत नहीं करना चाहिए.
2. व्यक्ति के पास दूसरे लोगों की गलती क्षमा करने का साहस होना चाहिए साथ ही उसे अपनी गलती स्वीकार करने की भी शक्ति होनी चाहिए.
3. व्यक्ति को आध्यात्मिक राह पर दो चीजों का ही परिक्षण करना होता है. पहला व्यक्ति को सही समय की प्रतीक्षा करना का धैर्य होना चाहिए और व्यक्ति को निराश नहीं होना चाहिए.
4. गुरु तेग बहादुर जी के विचार थे कि सफलता कभी अंतिम नहीं होती है. विफलता भी कभी अंतिम नहीं होती है. सफलता विफलता से अधिक मायने साहस रखता है.
5. व्यक्ति अपने अंहकार को जीत लेने के बाद सभी चीजों के द्वार के रूप में भगवान को देखता है. यह व्यक्ति ने जीवन मुक्ति को प्राप्त किया है.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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