धर्म
आज सोमवार दिन 19 जनवरी से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है. अक्सर लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि गुप्त नवरात्रि तांत्रिकों की पूजा के लिए होती है. चलिए जानें इस बात में कितनी सच्चाई है और गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा का क्या महत्व है.
नवरात्रि को आम तौर पर साल में दो बार मनाया जाने वाला पर्व माना जाता है, लेकिन शास्त्रों के अनुसार शक्ति उपासना का यह महापर्व वास्तव में चार बार आता है. चैत्र, आषाढ़, अश्विन और माघ मास में. इनमें से माघ और आषाढ़ की नवरात्रियों को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है, क्योंकि इन दिनों की साधना बाहरी उत्सव से नहीं, बल्कि आंतरिक तप और गोपनीय साधना से जुड़ी होती है.
साल 2026 में माघ मास की गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी से शुरू होकर 28 जनवरी तक चलेगी. यह समय तंत्र साधना, मंत्र-जप और आत्मिक शुद्धि के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है.
गुप्त नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
सामान्य नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है, जबकि गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की आराधना की जाती है. ये दस महाविद्याएं शक्ति के गूढ़ और रहस्यमय स्वरूपों का प्रतिनिधित्व करती हैं.मान्यता है कि जितनी गोपनीयता और एकाग्रता से इस काल में साधना की जाती है, देवी की कृपा उतनी ही शीघ्र प्राप्त होती है. यही कारण है कि यह पर्व साधकों, तांत्रिकों और योगियों के लिए विशेष माना जाता है.
2026 में दिनवार महाविद्या पूजन
19 जनवरी – मां काली
20 जनवरी – मां तारा
21 जनवरी – मां त्रिपुर सुंदरी
22 जनवरी – मां भुवनेश्वरी
23 जनवरी – मां भैरवी
24 जनवरी – मां छिन्नमस्ता
25 जनवरी – मां ध्रूमावती
26 जनवरी – मां बगलामुखी
27 जनवरी – मां कमलांगी
28 जनवरी – मां मातंगी
गुप्त नवरात्रि की पूजा के नियम
पहले दिन कलश (घट) स्थापना करें. प्रतिदिन प्रातः और सायंकाल देवी का ध्यान, दीप प्रज्वलन और मंत्र-जप करें. साधक अपने इष्ट मंत्र का जाप कर सकते हैं. नौ दिनों तक सात्विक आहार और संयम का पालन करें.मौन, ध्यान और आत्मचिंतन को विशेष महत्व दें.
गुप्त नवरात्रि की पूजा केवल तांत्रिकों के लिए होती है?
गुप्त नवरात्रि को आम तौर पर तांत्रिक साधना से जोड़ा जाता है, इसलिए यह धारणा बन गई है कि इसमें केवल तांत्रिक ही पूजा करते हैं. वास्तव में ऐसा नहीं है. तांत्रिक इस दौरान विशेष मंत्र-साधना और गुप्त अनुष्ठान करते हैं, लेकिन आम श्रद्धालु भी पूरी श्रद्धा से देवी की पूजा कर सकते हैं. गृहस्थ लोग कलश स्थापना, दुर्गा सप्तशती पाठ, मंत्र जप और व्रत जैसे सरल तरीकों से साधना करते हैं. फर्क केवल इतना है कि तांत्रिक गूढ़ विधियों का पालन करते हैं, जबकि सामान्य भक्त सात्विक और पारंपरिक पूजा करते हैं.
विशेष उपाय और साधना
1-गुप्त नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है. कहा जाता है कि इससे बाधाएं दूर होती हैं और साधक की मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं.
2-जो लोग समयाभाव के कारण संपूर्ण पाठ नहीं कर पाते, वे सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का नियमित पाठ कर सकते हैं. यह छोटा लेकिन अत्यंत प्रभावी स्तोत्र माना जाता है, जो सप्तशती के समान फल देने वाला बताया गया है.
3-गुप्त नवरात्रि केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशक्ति को जागृत करने का अवसर है. यह समय हमें याद दिलाता है कि सच्ची साधना शोर में नहीं, बल्कि मौन में फलित होती है. देवी की कृपा वहीं बरसती है, जहां मन स्थिर और भाव शुद्ध होता है.
डिस्क्लेमर- यह जानकारी सामान्य ज्योतिष के आधार पर लिखी गई है. अधिक जानकारी के लिए ज्योतिषाचार्य से संपर्क करें.
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