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Garh Mukteshwar: इस मंदिर की सीढ़ियों से आती हैं आवाजें, शिवलिंग पर अंकुरित होती है विशेष आकृति

Ganga Mandir: उत्तर प्रदेश के गढ़मुक्तेश्वर स्थित गंगा मंदिर कई रहस्यों से भरा हैं, इस मंदिर को कब-किसने बनवाया इसका भी कोई निश्चित प्रमाण नहीं हैं

Garh Mukteshwar: इस मंदिर की सीढ़ियों से आती हैं आवाजें, शिवलिंग पर अंकुरित होती है विशेष आकृति

इस मंदिर की सीढ़ियों से आती हैं रहस्यमयी आवाजें

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डीएनए हिंदी: Garh Mukteshwar, Ganga Mandir Rahasya- वैसे तो आपने बहुत से मंदिरों के बारे में सुना होगा. लेकिन आज हम आपको देश के एक बहुचर्चित और रहस्यमयी शिव मंदिर के बारे में बता रहे हैं. यहां पूरे साल श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. उत्तर प्रदेश के गढ़मुक्तेश्वर स्थित मंदिर को प्राचीन गंगा मंदिर के नाम से जाना जाता है. यहां  मां गंगा के साथ-साथ ब्रह्मा जी की एक सफेद मूर्ति स्थापित है इसके अलावा मंदिर में एक चमत्कारी शिवलिंग भी है.

गढ़मुक्तेश्वर में मौजूद इस मंदिर का उल्लेख पुराणों में भी देखने को मिलता है. देवी गंगा का यह मंदिर शहरी आबादी के एक छोर पर लगभग 80 फीट ऊंचे टीले पर बना हुआ है. यहां से गंगा नदी लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर है.

हजारों वर्ष से भी पुराना है यह मंदिर

इस रहस्यमयी मंदिर की स्थापना कब और किसने की इसका कोई निश्चित प्रमाण उपलब्ध नहीं है. लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि इस मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना हैं, इसके अलावा मंदिर की वर्तमान संरचना को बने हुए भी लगभग 600 वर्ष हो चुके हैं. मंदिर से संबंधित मूल इतिहास के बारे में कोई विशेष जानकारी किसी के पास नहीं है. 

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मंदिर की सीढ़ियों से आती हैं रहस्यमयी आवाजें

यह मंदिर बेहद ऊंचाई पर स्थित है ऐसे में मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को लंबी सीढियां चढ़नी पड़ती हैं. मंदिर तक जाने वाली ये सीढ़ियां रहस्यमयी पत्थर से बनी हुई हैं. जब कोई भी व्यक्ति मंदिर की इन सीढ़ियों पर चढ़ता हैं या पत्थर फेंकता हैं तो पानी में पत्थर मारने जैसी आवाज आती हैं. कहा जाता है कि प्राचीन काल में गंगा नदी का पानी इस मंदिर की सीढ़ियों तक आता था. लेकिन अब गंगा नंदी मंदिर से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर है.

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हर साल शिवलिंग पर अंकुरित होती है विशेष आकृति

मंदिर में स्थित शिवलिंग के बारे किंवदंती है कि इसके ऊपर हर साल कार्तिक माह में अपने आप एक विशेष आकृति अंकुरित होती है. मंदिर के पुजारी की मानें तो शिवलिंग के ऊपर अंकुरित होने वाली यह आकृति हर बार अलग आकार एवं रूप में निकलती है. आजतक कोई भी विशेषज्ञ और वैज्ञानिक इस रहस्य का खुलासा नहीं कर पाए हैं.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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