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Ganesh Chaturthi 2025: चूहा कैसे बना भगवान गणेश जी का वाहन, जानें इसकी पूरी कथा

गणेश चतुर्थी पर भगवान गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापना की जाती है. भगवान के साथ उनकी सवारी मूषक भी रहता है. आइए जानते हैं कि मूसक उनकी सवारी कैसे बना.

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Ganesh Chaturthi 2025: चूहा कैसे बना भगवान गणेश जी का वाहन, जानें इसकी पूरी कथा
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गणेश चतुर्थी पर भगवान गणपति बप्पा की मूर्ति घर में स्थापित की जाती है. उनके साथ उनकी सवारी के रूप में मूषक भी रहता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मूषक भगवान गणेश की सवारी कैसे बना. उनका इससे क्या संंबंध है. आइए विस्तार से जानते हैं. चूहे के भगवान गणेश जी की सवारी बनने की पूरी कथा क्या है...

गंधर्व जो चूहा बन गया

एक बार, भगवान इंद्र के दरबार में, जब इंद्र किसी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा कर रहे थे, क्रौंच नामक एक गंधर्व अप्सराओं के साथ विनोद में व्यस्त था. क्रौंच के व्यवहार से इंद्र क्रोधित हो गये.  उसे चूहे के रूप में जन्म लेने का श्राप दे दिया. शापित गंधर्व ने ऋषि पाराशर के आश्रम में एक चूहे के रूप में पुनर्जन्म लिया. अपने चंचल स्वभाव के कारण, चूहे ने उत्पात मचाया—घड़े तोड़ डाले, सारा भोजन खा गए, बगीचे को नष्ट कर दिया, यहां तक कि ऋषियों के पवित्र ग्रंथों और वस्त्रों को भी चबा डाला. इस विनाश से दुखी होकर, ऋषि पाराशर ने भगवान गणेश से मदद की प्रार्थना की.

भगवान गणेश ने निकाला अपना दिव्य पाश

गणेशजी ने तब अपना दिव्य पाश निकाला. उन्होंने मूसक को पकड़ने के लिए अपने पाश को छोड़ दिया. दिव्य पाश मूषक का पाताल तक पीछा करता रहा और अंततः मूषक को गणेश जी के सामने घसीटता हुआ ले गया. भयभीत होकर मूसक ने गणपति से दया की भीख मांगी. गणेशजी उसके समर्पण से प्रसन्न हुए और मूषक से वरदान मांगने को कहा. अहंकार से ग्रस्त मूषक ने उत्तर दिया, "मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए. यदि किसी को वरदान मांगना चाहिए, तो वह आप ही हैं." मूषक के अभिमान पर मुस्कुराते हुए गणेशजी ने कहा, "तो फिर तुम मेरे वाहन बन जाओ." मूषक मान गया,लेकिन जब गणेश जी उस पर बैठे, तो उनके भार से मूषक कांपने लगा. उसने राहत की प्रार्थना की और दयावश गणेशजी ने स्वयं को सवारी के लिए हल्का बना लिया. इस प्रकार गणेशजी ने मूषक का अभिमान तोड़ दिया और उसे अपना शाश्वत वाहन बना लिया.

गजमुखासुर की पराजय

एक अन्य कथा गजमुखासुर नामक एक राक्षस के बारे में है, जिसने अपनी शक्ति से देवताओं को आतंकित कर रखा था. देवताओं ने भगवान गणेश की सहायता ली. गणेश जी ने राक्षस से भीषण युद्ध किया. इसमें राक्षस का एक दांत टूट गया. भगवान गणेश ने राक्षस के दांत को गजमुखासुर पर फेंक दिया, जिससे वह भयभीत हो गया और बचने के लिए मूषक का रूप धारण कर लिया.
हालाँकि, गणेशजी ने उसे तुरंत पकड़ लिया. अपनी जान के डर से, राक्षस ने क्षमा याचना की. दया दिखाते हुए, भगवान गणेश ने उसे छोड़ दिया और घोषणा की कि अब से वह मूषक के रूप में उनका वाहन बनेगा.

Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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