धर्म
आज आपको एक ऐसे देवी मंदिर के बारे में बताएंगे जहां रात में जाने से लोगों के पसीने छूटते हैं क्योंकि मंदिर से रात में अजीब आवाजे आती हैं.
आज आपको जिस मंदिर के रहस्य के बारे में बताने जा रहे हैं वह ओडिशा का शक्तिपीठ है. हीरापुर गांव में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर एक शक्तिपीठ है. 864 ई. में रानी हीरादेवी द्वारा निर्मित यह भारत का पहला छतविहीन योगिनी मंदिर है, जिसे महामाया पीठ के नाम से भी जाना जाता है.
ओडिशा राज्य के भुवनेश्वर से 20 किलोमीटर दूर हीरापुर गांव में शक्तिपीठ चौसठ योगिनी मंदिर स्थापित है. इस मंदिर की विशेषताएँ बहुत अनोखी हैं. यह मंदिर शक्ति की उपासना के लिए बनाया गया है.
माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 864 ई. में लोनाभद्र उर्फ शांतिकरदेव द्वितीय के भूमि वंश की रानी हीरादेवी ने करवाया था. यह भारत का पहला चौसठ योगिनी मंदिर है. स्थानीय पुजारियों के अनुसार, इस मंदिर के पीछे की किंवदंती यह है कि देवी दुर्गा ने एक राक्षस को हराने के लिए 64 देवियों का रूप धारण किया था. इस चौसठ योगिनी मंदिर का निर्माण इसी देवी के लिए किया गया था.
इस मंदिर की वास्तुकला आपको हैरान कर देगी. आमतौर पर सभी मंदिरों का ऊपरी हिस्सा बंद रहता है, लेकिन इस मंदिर का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह खुला है. यह छत रहित मंदिर तांत्रिक प्रार्थनाओं के लिए बनाया गया है. चूंकि तांत्रिक अनुष्ठानों में पृथ्वी यानी पांच तत्वों - अग्नि, जल, पृथ्वी, वायु और आकाश - की पूजा की जाती है, इसलिए मंदिर का ऊपरी हिस्सा खुला रखा जाता है.
यहां पशु, राक्षस या मानव सिर पर खड़ी योगिनियों की मूर्तियों को देखकर आपको थोड़ी असहजता महसूस हो सकती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहां की मूर्तियां महिला शक्ति की विजय का प्रतीक हैं. ये मूर्तियां क्रोध और दुख से लेकर खुशी, इच्छा और प्रसन्नता तक सब कुछ व्यक्त करती हैं.
यह मंदिर एक खास जगह है. आम तौर पर माना जाता है कि शाम के समय यहां एक योगिनी (आध्यात्मिक महिला) घूमती है. उसकी आवाज़ भी सुनी जा सकती है. इसलिए स्थानीय ग्रामीण पर्यटकों को सुबह यहां आने और दोपहर तक वापस जाने की सलाह देते हैं.
(Disclaimer: ये जानकारी सामान्य मान्यताओं और लोक कथाओं के आधार पर आधारित है.)
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