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Akal Mrityu bachav Upay: आज छोटी दिवाली पर पुराने दीये से होती है यमराज की पूजा, जानें नियम और विधि

Yam ka Diya: छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी पर यमराज के नाम दीपदान किया जाता है. चलिए जानें इस परंपरा के पीछे मान्यता है और दीपदान की पूरी विधि.

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Akal Mrityu bachav Upay: आज छोटी दिवाली पर पुराने दीये से होती है यमराज की पूजा, जानें नियम और विधि


छोटी दिवाली पर पुराने दीये से होती है यमराज की पूजा

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डीएनए हिंदीः छोटी दिवाली इस बार 23 अक्टूबर को है और इस दिन रात में यम का दीया निकालने की पंरपरा है. खास बात ये है कि यमराज के नाम से निकलने वाला ये दीया नया नहीं पुराना होता है. 

छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी या यम दीपावली के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन रात में मत्यु के देवता यमराज के नाम से एक दीपक जलाया जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और लोगों को अकाल मृत्यु के भय से छुटकारा दिलाते हैं. इस मान्यता से जुडी एक कथा भी है. 

यमराज के नाम इस दिन दीपदान की मान्यता ही नहीं, पूजा विधि भी बेहद अलग होती है. छोटी दिवाली नया नरक चतुर्दशी की रात यम का दिया निकाला जाता है. तो चलिए इस परंपरा के पीछे की मान्यता के साथ ही इस दीप को निकालने की पूरी विधि भी जान लें. 

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पौराणि कथा से जानें यमराज की पूजा का महत्व
प्राचीन समय में एक धर्मात्मा राजा रतिदेव थे. राजा रतिदेव ने अपने जीवनकाल में कभी कोई पाप नहीं किया था बावजूद जब उनकी मृत्यु हुई तो यमराज उन्हें नरक में लेकर जाने लगे तब राजा यमदूत से पूछे कि उनके किस कर्म के कारण नरक लोक ले जाया जा रहा हैै? तब यमदूत नें उन्हें बताया कि एक बार आपके द्वार से एक ब्राह्मण भूखा पेट लौट गया था. यह आपके उसी कर्म का फल है.

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इस बात को सुनते ही राजा ने यमराज से अपने लिए एक साल का और जीवनकाल मांगा और यमराज ने उनकी इच्छा मान ली. इसे बाद राजा ऋषियों के पास अपनी समस्या लेकर पहुंचे तब ऋषियों ने उन्हें कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत रखने के साथ  ब्राह्मणों को भोजन कराने की सलाह दी. एक साल बाद यमदूत राजा को फिर लेने आए. इस बार उन्हें नरक के बजाय स्वर्ग लोक ले गए तब ही से कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष को दीप जलाने की परंपरा शुरू हुई और यमराज ने क्योंकि मृत्यु को टाल दिया था इसलिए यमराज की भी पूजा होने लगी.

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यम का दीया निकालने के ये हैं नियम और विधि

  • छोटी दिवाली को जब परिवार का हर सदस्य घर में आ जाए और खाना-पीना आदि सारी ही क्रियाएं हो जाएं तब यम के नाम का दीया निकाला जाता है.
  • इस दिन पुराने दीये को साफ कर के उसमें सरसों का तेल डालें और रई की एक बाती रखें. 
  • अब एक लोटे या ग्लास में जल भर लें. दीया जला लें और पूरे घर में दीये को दिखाते हुए जल लेकर घर के बार किसी कूड़े या नाली के पास दीये को रख दें और जल चढ़ाकर वापस आ जाएं. याद रखें वापस दीये को मुडकर न देखें. 
  • दीपक जलाते समय निम्न मंत्र का उच्चारण करेंः

    मृत्युना पाश दण्डाभ्यां कालेन च मया सह।

    त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यज: प्रीयतामिति॥

नोटः जब दीया जला लें उसके बाद किसी से न कुछ बोलें न कोई पीछे से आपको टोंके. इसके लिए पहले ही घर वालों को निर्देश दे दें. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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