धर्म
छठ पूजा सूर्य देव और उनकी बहन छठी मैया को समर्पित है. यह त्योहार संतान प्राप्ति और परिवार के उज्ज्वल भविष्य के लिए मनाया जाता है. इसमें महिलाएं निर्जला व्रत रखकर अपनी मनोकामन मांगती हैं, जिसे माता रानी पूर्ण करती हैं.
दिवाली के बाद छठ के त्योहार की तैयारियां शुरू हो गई है. यह त्योहार बिहार से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल तक के भी कुछ हिस्सों में बड़े ही भक्तिभाव के साथ मनाया जाता है. छठ का व्रत सूर्यदेव और छठी मैया को समर्पित है. इसमें छठी मैया और सूर्यदेव की विशेष पूजा की जाती है. छठ चार दिनों का पर्व है. यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से शुरू होता है. छठी व्रत संतान प्राप्ति, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के लिए सूर्यदेव की उपासना की जाती है. व्रती नदी किनारे खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य को जल अर्पित करते हैं. इसके साथ ही यह निर्जला व्रत होता है. आइए जानते हैं इसकी तारीख से लेकर शुभ मुहूर्त और महत्व...
छठ पूजा सूर्य देव और उनकी बहन छठी मैया को समर्पित है. यह त्योहार संतान प्राप्ति और परिवार के उज्ज्वल भविष्य के लिए मनाया जाता है. इसमें महिलाएं निर्जला व्रत रखकर अपनी मनोकामन मांगती हैं, जिसे माता रानी पूर्ण करती हैं.
दिवाली के बाद हिंदू धर्म का बड़ा त्योहार छठ है. इस बार छठ पूजा 27 अक्टूबर 2025 को शाम के अर्घ्य और 28 अक्टूबर को सुबह के अर्घ्य के साथ होगी. वहीं कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी और सप्तमी तिथियों पर मनाया जाएगा. हालांकि छठ की शुरुआत 25 अक्टूबर 2025 को 'नहाय खाय' के साथ होगी. इसके बाद 26 अक्टूबर को 'खरना' और 27 अक्टूबर को 'डूबते सूर्य का अर्घ्य' होगा. आखिर में 28 अक्टूबर को 'उगते सूर्य के अर्घ्य' दिया जाएगा.
छठ पूजा की नहाय खाय से शुरुआत होती है. इस बार नहाय खाय 25 अक्टूबर 2025 को है. इस दिन व्रती महिलाएं नदी या जलाशय में स्नान करके व्रत शुरु करती हैं. इसके बाद व्रती महिलाएं सिर्फ 1 बार भोजन करते हैं.
नहाय खाय के अगले दिन खरना किया जाता है. यह 26 अक्टूबर को है. इस दिन निर्जला व्रत रखते हैं. शाम को सूर्यदेव को जल और भोजन अर्पित कर पूरा दिन जल और अन्न का त्याग किया जाता है. सूर्यास्त के बाद गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद खाकर व्रत तोड़ा जाता है.
छठ का तीसरा दिन 27 अक्टूबर 2025 को होता है. इस दिन व्रती महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं. इसके साथ ही शाम को नदी या तालाब के किनारे खड़े होकर सूर्य को जल अर्पित करती हैं.
उषा अर्घ्य छठ पूजा का आखिरी दिन होता है. इसमें सुबह जल्दी उठकार महिलाएं उगते सूर्य को अर्घ्य देती हैं. अर्घ्य देने के बाद व्रती कच्चे दूध और जल से व्रत का पारण करती है और छठ पूजा का समापन होता है.
Disclaimer: यह खबर सामान्य ग्रह-गणनाओं और सामान्य ज्योतिष पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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