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Kedarnath Dham: आज खुले बाबा केदारनाथ के कपाट, 54 प्रकार के 108 क्विंटल फूलों से सजे मंदिर के दर्शन करने पहुंचे यात्री

केदारनाथ धाम में मंदिर को 54 अलग अलग तरह के फूलों से सजाया गया है. इसमें देश ही नहीं, विदेशों से भी फूल लाये गये हैं. इनमें नेपाल, थाईलैंड से लेकर श्रीलंका तक के फूल शामिल हैं.

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Kedarnath Dham: आज खुले बाबा केदारनाथ के कपाट, 54 प्रकार के 108 क्विंटल फूलों से सजे मंदिर के दर्शन करने पहुंचे यात्री
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Kedarnath Dham Gates Open: चारधाम यात्रा शुरू होने के तीसरे दिन यानी 2 मई 2025 शुक्रवार को केदारनाथ धाम के कपाट खुल गए हैं. भगवान शिव को समर्पित बाहर ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यह उत्तराखंड में स्थित बेहद महत्वपूर्ण चारधाम में से एक हैं. चारधाम यात्रा की शुरुआत हो चुकी है. यह सिर्फ 45 दिनों तक जारी रहेगी. अक्षय तृतीया के पावन पर्व के शुभ मुहूर्त पर चारधाम यात्रा की शुरुआत की गई है. कपाट खुलने की प्रक्रिया में सभी पारंपरिक अनुष्ठान और मुहूर्त देखे जाते हैं. इसी के बाद मंदिर के कपाट खोले जाते हैं. इसमें बाबा केदार की चल विग्रह डोली का उनके शीतकालीन प्रवास स्थल, उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर से केदारनाथ धाम तक निकाला जाता है. इस दौरान मंदिर को बहुत ही भव्य तरीके से सजाया जाता है. भारी बर्फबारी और ठंड के बीच महादेव का यह मंदिर भक्तों से घीर जाता है. 

आज इस समय खुले मंदिर के कपाट

चारधाम यात्रा की शुरुआत अक्षय तृतीया से हो चुकी है. इसके बाद आज यानी 2 मई 2025 को केदारनाथ धाम के कपाट खुल चुके हैं. कपाट सुबह 7 बजे खोले गये. इस दौरान पुजारियों के साथ ही बाबा के भक्त भी मौजूद रहे. सभी बाबा की पूजा अर्चना और आरती की. प्रसाद बांटा गया. इसके बाद चारधाम की यात्रा पर निकलकर केदारनाथ धाम पहुंचे यात्रियों से बाबा के दर्शन किये. 

भव्य तरीके से सजाया गया केदारनाथ मंदिर

मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही केदारनाथ धाम को भव्य रूप से सजाया गया है. धाम को सजाने के लिए करीब 108 क्विंटल फूलों का इस्तेमाल किया गया है. इस दौरान मंदिर देखते ही बनता है. यहां का नजारा और बाबा के दर्शन कर लोग मंत्रमुग्ध हो गये. वहीं बता दें कि केदारनाथ धाम रुद्रप्रयाग जिले में समुद्र तल से करीब 11000 फुट से भी ज्यादा ऊंचा है. 

दिनरात की मेहनत से सजाया गया मंदिर

केदारनाथ मंदिर को सजाने में एक या दो नहीं बल्कि 150 से भी ज्यादा स्वयंसेवकों ने दिन रात की मेहनत की है. इस टीम का नेतृत्व कर रहे गुजरात के वडोदरा निवासी सृजल व्यास के अनुसार, मंदिर को 54 तरह के अलग अलग फूलों से मंदिर को सजाया गया है. इसमें गुलाब से लेकर गेंदा समेत अन्य तरह के फूल इस्तेमाल किये गये हैं. उन्होंने बताया कि ये फूल दिल्ली एनसीआर और कश्मीर समेत अलग अलग देशों से मगाये गये हैं. इनमें नेपाल, थाईलैंड और श्रीलंका के फूल भी शामिल हैं. व्यास ने बताया कि गेंदे के फूल विशेष रूप से कोलकाता के एक खास गांव से लाए जाते हैं, क्योंकि स्थानीय किस्म के विपरीत ये जल्दी मुरझाते नहीं हैं. इसके साथ मंदिर को सजाने के लिए 150 से भी ज्यादा स्वयंसेवकों ने दिन रात एक कर दिये. 
 

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