धर्म
नवरात्रि 2025 के 6वें दिन देवी कात्यायनी की पूजा की जाती है. कात्यायनी देवी दुर्गा के 9 रूपों में से एक हैं. देवी कात्यायनी की पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र एवं कथा और आरती क्या है, यहां जान लें.
चैत्र नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की विधिवत पूजा की जाती है. इसके अलावा, उसके लिए व्रत भी रखा जाता है. प्राचीन शास्त्रों में मां कात्यायनी की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है. मां कात्यायनी की पूजा करने से तपस्वी को मृत्युलोक में स्वर्गीय आनंद की प्राप्ति होती है. उसे आय, सौभाग्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती है. माँ अपने भक्तों पर विशेष कृपा करती हैं. उनकी कृपा से साधक के जीवन में धन की स्थापना होती है. इसलिए भक्तजन भक्तिभाव से देवी कात्यायनी की पूजा करते हैं. अगर आप भी मां कात्यायनी की कृपा का भागी बनना चाहते हैं तो नवरात्रि 2025 के 6वें दिन इस तरह करें देवी कात्यायनी की पूजा.
देवी दुर्गा के अवतारों में से एक मां कात्यायनी के स्वरूप की बात करें तो उनकी चार भुजाएं हैं और वह शेर की सवारी करती हैं. वह अपने दोनों हाथों में कमल और तलवार लिये हुए हैं. उनके अन्य दो हाथों में से एक हाथ वरदान देने वाली मुद्रा में वर मुद्रा धारण किये हुए है, तथा दूसरे हाथ में अभय मुद्रा है. नवरात्रि पर्व के छठे दिन उनकी पूजा की जाती है.
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:44 बजे से 05:34 बजे तक
- सुबह का समय- सुबह 05:09 बजे से 06:25 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:43 बजे से 12:28 बजे तक
- विजय मुहूर्त- दोपहर 01:59 बजे से 02:45 बजे तक
- गोधूलि बेला- शाम 05:47 बजे तक 06:12 PM
- संध्या मुहूर्त - 05:47 PM से 07:03 PM
- अमृत काल - 02:23 PM से 03:58 PM
- निशिता मुहूर्त - 11:41 PM से 12:31 AM
- रवि योग - 06:25 AM से 08:41 AM तक
देवी कात्यायनी को लाल रंग सबसे अधिक प्रिय है. इस दिन देवी भगवती को लाल गुलाब के फूल चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से माता का आशीर्वाद आसानी से प्राप्त होता है. लाल रंग के अलावा, शहद और घी देवी कात्यायनी को सबसे प्रिय रंग हैं. पूजा के दौरान माता कात्यायनी को शहद अर्पित करना चाहिए. ऐसा करने से भक्त के व्यक्तित्व में निखार आएगा.
- कात्यायनी की पूजा का समय शाम का है. इसलिए इस दौरान धूप, दीप और गुग्गुल से देवी मां की पूजा करनी चाहिए.
- कात्यायनी की पूजा शाम के समय पीले या लाल वस्त्र पहनकर करनी चाहिए.
- मां की मूर्ति का शुद्ध जल या गंगाजल से अभिषेक करें.
- माता को लाल रंग और केसर का टीका लगाएं.
- उन्हें पीले फूल और पीला नैवेद्य अर्पित करें.
- अपनी मां के सामने दीपक जलाएं.
- इसके बाद हल्दी की 3 गांठें भी चढ़ाएं.
- पूजन के बाद हल्दी की गोलियां अपने पास सुरक्षित रख लें.
- माता कात्या को शहद अर्पित करें.
- इस शहद को चांदी या मिट्टी के बर्तन में चढ़ाना सबसे अच्छा है.
- मां को सुगंधित फूल चढ़ाने से विवाह संबंधी परेशानियां दूर होंगी
- इसके बाद मां के सामने बैठकर मंत्रों का जाप करें.
या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः.
मां कात्यायनी की प्रार्थना
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना.
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी..
मां कात्यायनी बीज मंत्र
क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम
1. ओम देवी कात्यायन्यै नमः॥
2. एत्तते वदनम साओमयम् लोचन त्रय भूषितम.
पातु नः सर्वभितिभ्य, कात्यायनी नमोस्तुते..
धार्मिक पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवताओं की संयुक्त शक्तियों से प्रकट हुई कात्यायनी राक्षस महिषासुर का वध करने के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं. हिंदू धर्म में, महिषासुर एक शक्तिशाली आधा मानव और आधा भैंसा राक्षस था, जो अपनी रूप बदलने की क्षमता का उपयोग बुरे उद्देश्यों के लिए करता था. उनके उत्पीड़न से क्रोधित होकर सभी देवताओं ने अपनी शक्ति एकत्रित कर कात्यायनी की रचना की. इससे देवी कात्यायनी महिषासुर का वध करती हैं.
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी.
जय जगमाता, जग की महारानी.
बैजनाथ स्थान तुम्हारा.
वहां वरदाती नाम पुकारा.
कई नाम हैं, कई धाम हैं.
यह स्थान भी तो सुखधाम है.
हर मंदिर में जोत तुम्हारी.
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी.
हर जगह उत्सव होते रहते.
हर मंदिर में भक्त हैं कहते.
कात्यायनी रक्षक काया की.
ग्रंथि काटे मोह माया की.
झूठे मोह से छुड़ाने वाली.
अपना नाम जपाने वाली.
बृहस्पतिवार को पूजा करियो.
ध्यान कात्यायनी का धरियो.
हर संकट को दूर करेगी.
भंडारे भरपूर करेगी.
जो भी मां को भक्त पुकारे.
कात्यायनी सब कष्ट निवारे.
Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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