धर्म
यह मंदिर ओडिशा के पुरी में चक्र तीर्थ मार्ग पर स्थित है. यह पुरी के समुद्र तट के पास एक छोटा सा मंदिर है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस मंदिर को कभी 'दरिया महावीर मंदिर' कहा जाता था.
क्या आपने कभी ऐसा मंदिर देखा है, जहां हनुमान जी को दंड भोगते हुए देखा गया हो? हमारी दुनिया में हनुमान जी के करोड़ों भक्त हैं. मान्यता है कि उनकी पूजा करने से जीवन की कई परेशानियां दूर हो जाती हैं. इसी वजह से हनुमान जी को मंदिर में स्थापित किया जाता है और उनकी भक्ति भाव से पूजा की जाती है. इस अनोखे मंदिर में हनुमान जी के हाथ बंधे हुए हैं. इस मंदिर को खास तौर पर बेदी हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है.
यह मंदिर ओडिशा के पुरी में चक्र तीर्थ मार्ग पर स्थित है. यह पुरी के समुद्र तट के पास एक छोटा सा मंदिर है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस मंदिर को कभी 'दरिया महावीर मंदिर' कहा जाता था. 'दरिया' का अर्थ है समुद्र और 'महावीर' का अर्थ है हनुमान. इस दरिया महावीर (अंजनेय स्वामी) को समुद्र के प्रकोप से पुरी की रक्षा करने वाले और सीमाओं की रक्षा करने वाले देवता के रूप में पहचाना जाता है.
लोककथाओं के अनुसार, पुरी के भगवान जगन्नाथ ने हनुमान को समुद्र के प्रकोप से दिन-रात पुरी की रक्षा करने की ज़िम्मेदारी सौंपी थी. एक दिन हनुमान अपनी ज़िम्मेदारी भूलकर भगवान जगन्नाथ को बताए बिना ही अयोध्या में मिठाई खाने चले गए. इस प्रकार, हनुमान की अनुपस्थिति में, समुद्र का सारा पानी पुरी में घुस गया और पूरा जगन्नाथ मंदिर जलमग्न हो गया.
जगन्नाथ को पता चला कि हनुमान अयोध्या चले गए हैं. क्रोधित होकर, जगन्नाथ ने पुरी लौटने पर हनुमान के हाथ-पैर रस्सियों से बांध दिए और उन्हें समुद्र तट पर निगरानी रखने का आदेश दिया. तब से, किसी भी कारण से समुद्र का पानी पुरी जगन्नाथ मंदिर तक कभी नहीं पहुंचा.
जी हाँ, पुरी जगन्नाथ मंदिर जाते समय आपको इस मंदिर के दर्शन अवश्य करने चाहिए. दरअसल, अंजनेय स्वामी का यह रूप आपको और कहीं देखने को नहीं मिलेगा, लेकिन दक्षिण भारत के तिरुपति में हनुमान जी का एक ऐसा ही मंदिर है. पौराणिक कथा के अनुसार, जब हनुमान ऊँट की तलाश में तिरुपति पहुँचे, तो उनकी माता अंजना देवी क्रोधित हो गईं और उन्होंने हनुमान के हाथों में बेड़ियाँ डाल दीं. वे अंजनेय स्वामी आज भी तिरुपति में विराजमान हैं . यहाँ भगवान जंजीरों में जकड़े हुए दिखाई देते हैं.
बेदी हनुमान मंदिर के मुख्य देवता हनुमान हैं, जिनकी दो भुजाएँ हैं और वे अपने दाहिने हाथ में गदा और बाएँ हाथ में करछुल धारण करते हैं. उनके बाकी दो हाथ बेदी के बने हैं. इस मंदिर की वास्तुकला अद्भुत है और इसमें विभिन्न देवताओं की जटिल आकृतियाँ देखी जा सकती हैं. दीवारों पर देवी अंजना की गोद में लेटे हुए हनुमान की प्रतिमा भी बनी है. यदि आप पुरी में भगवान हनुमान को समर्पित इस छोटे से मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं, तो पास के समुद्र तट पर भी जाएं.
Disclaimer: यह खबर सामान्य ग्रह-गणनाओं और सामान्य ज्योतिष पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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