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28 जुलाई तक मंगल-केतु युति से होगा गंभीर खतरा, नौकरी जाने से लेकर दुर्घटना तक की संभावना प्रबल

पिछले डेढ़ महीने से मंगल और केतु की भयंकर युति चल रही है, जिसका कहर पूरे देश और दुनिया को झेलना पड़ रहा है. लेकिन अब स्थिति और भी ख़तरनाक हो गई है. काम पर भी गदा आएगी, सावधान रहें.

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28 जुलाई तक मंगल-केतु युति से होगा गंभीर खतरा, नौकरी जाने से लेकर दुर्घटना तक की संभावना प्रबल

28 जुलाई तक मंगल-केतु युति से होगा गंभीर खतरा 

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अग्नि तत्व वाले ग्रह मंगल और केतु बेहद अशुभ स्थिति में हैं. केतु सिंह राशि में है और मंगल भी सिंह राशि में. मंगल और केतु की युति का कहर पूरी दुनिया ने युद्ध, हिंसा, विमान दुर्घटनाएँ, भूस्खलन आदि के रूप में झेला है. लेकिन अब ज्योतिष कहता है कि अगले 7 दिन और भी ज़्यादा ख़तरनाक होने वाले हैं. बेशक, इससे घबराने की ज़रूरत नहीं है. बस हमें सोच-समझकर काम करने की ज़रूरत है. 

मंगल और केतु की युति को ज्योतिष में "कुज-केतु" या "अंगारक दोष" के नाम से जाना जाता है. यह एक शक्तिशाली युति है जो जातक के जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है. यह युति जातक को ऊर्जावान, उत्साही और साहसी तो बना सकती है, लेकिन साथ ही कुछ चुनौतियां और समस्याएं भी पैदा कर सकती है, तो आइए जानते हैं कि आखिर यह क्या है.

वर्तमान स्थिति क्या है? 

दरअसल, 21 जुलाई से 28 जुलाई तक मंगल केतु में गोचर करेगा, जो और भी खतरनाक स्थिति है. ऐसे में इस दौरान ज़्यादा सावधानी बरतने की ज़रूरत है. 28 जुलाई को जब मंगल गोचर करके कन्या राशि में प्रवेश करेगा, तो यह युति टूट जाएगी और लोगों को थोड़ी राहत मिलेगी.

इतना ही नहीं, मंगल-केतु शनि के साथ षडाष्टक योग भी बना रहे हैं. जिसके कारण यह युति भयंकर परिणाम दे रही है. क्रूर ग्रह शनि इस समय वक्री अवस्था में है. इस कारण अब इसका प्रभाव कुछ कम हो गया है.
 
कौन सी राशियां प्रभावित होती हैं?

मंगल और केतु की अशुभ युति 4 राशियों के लोगों के लिए विशेष रूप से नकारात्मक कही जा सकती है. ये राशियाँ हैं मेष, सिंह, कन्या और मीन. 28 जुलाई तक का समय इन राशियों के करियर पर अशुभ प्रभाव डाल सकता है. इसलिए अपना काम पूरी ईमानदारी से करें. क्रोध में आकर कोई भी निर्णय न लें. जितना हो सके शांत रहने की आवश्यकता है. 

जिन लोगों की कुंडली में मंगल, राहु और केतु अशुभ स्थिति में हैं, उन्हें विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है. इन लोगों के वैवाहिक जीवन में परेशानियाँ आ सकती हैं. इनका किसी से विवाद हो सकता है. इन्हें आर्थिक नुकसान हो सकता है. इनके करियर में भी समस्याएँ आ सकती हैं. इसलिए आपको सही निर्णय लेने की आवश्यकता है. 

मंगल और केतु की युति के संभावित परिणाम:

साहस और वीरता: मंगल ऊर्जा और साहस का प्रतीक है, जबकि केतु एकांत और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक है. जब ये दोनों ग्रह एक साथ आते हैं, तो जातक को अत्यंत साहसी और बहादुर बना सकते हैं.

अचानक घटनाएं: केतु अप्रत्याशितता का प्रतीक है, इसलिए मंगल-केतु की युति जातक के जीवन में अचानक घटनाओं का कारण बन सकती है.

असंतुलन: यह युति जातक के जीवन में असंतुलन पैदा कर सकती है, खासकर जब मंगल और केतु दोनों नकारात्मक रूप से प्रभावित हों.

स्वास्थ्य समस्याएं: मंगल-केतु की युति रक्तचाप, हृदय रोग और चोट जैसी स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है.

रिश्तों में दूरी: केतु किसी से दूर जाने का भी प्रतीक है, इसलिए यह युति जातक को सामाजिक रूप से अलग-थलग महसूस करा सकती है या रिश्तों में समस्या पैदा कर सकती है.

अंगारक दोष: यदि मंगल और केतु एक साथ अशुभ भाव में हों तो यह “अंगारक दोष” बना सकता है, जिसे एक हानिकारक योग माना जाता है.

मंगल-केतु युति के उपाय:

भगवान हनुमानजी की पूजा करें.
मंगलवार को उपवास रखें
लाल वस्त्र पहनें.
दान करें
केतु मंत्र का जाप करें.
कुत्ते को खाना खिलाओ.

Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है. इस पर अमल करने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें. 

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