धर्म
सोमवार से पंचक शुरू हो गया है और ये अशुभ समय बहुत भारी हो सकता है इसलिए 5 दिनों तक कुछ काम करने की भूल कभी न करें.
गरुड़ पुराण और अन्य ज्योतिष ग्रंथों में पंचक के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, सोमवार की दोपहर 11 बजे से पंचक शुरू हो गया है जो शुक्रवार तक चलेगा. ऐसा कहा जाता है कि इस अवधि के दौरान 5 मौतें होती हैं.
हिंदू ज्योतिष में पंचक को अशुभ माना जाता है और इस दौरान विशेष सावधानियां बरती जाती हैं. वैदिक पंचांग के अनुसार, 16 जून 2025 से पंचक शुरू हो चुका है, जो अगले पांच दिनों तक रहेगा. इस दौरान कुछ काम करने से नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं, इसलिए लोग शुभ कामों से बचते हैं. पंचक के दौरान कौन से काम नहीं करने चाहिए? साथ ही, अगर इस दौरान किसी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके बाद होने वाली 5 मौतों का क्या कनेक्शन है? आइए जानें..
पंचक क्या है? यह कब शुरू होता है?
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पंचक हर 27 दिन में होता है और इसे अशुभ माना जाता है क्योंकि इस अवधि के दौरान किए गए कुछ कामों का प्रभाव पांच गुना बढ़ सकता है, जिससे नुकसान हो सकता है. पंचक सोमवार, 16 जून 2025 को दोपहर 1:10 बजे शुरू हो चुका है, और 20 जून को रात 9:45 बजे समाप्त होगा. जून में राज पंचक शुरू हो रहा है. यह अन्य पंचकों की तुलना में कम अशुभ है, लेकिन फिर भी सावधानी बरतनी चाहिए. वास्तव में पंचक कई प्रकार के होते हैं, जिन्हें दिन के अनुसार विभाजित किया जाता है. पंचक एक ज्योतिषीय योग है जो पांच विशेष नक्षत्रों में चंद्रमा के गोचर के दौरान बनता है: धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती. ये नक्षत्र कुंभ और मीन राशि में आते हैं. इन नक्षत्रों को पार करने में चंद्रमा को लगभग पांच दिन लगते हैं, इसलिए इस अवधि को 'पंचक' कहा जाता है.
गरुड़ पुराण, ज्योतिष में सावधान रहने की चेतावनी
हिंदू धर्म में पंचक को महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह स्वास्थ्य, धन और परिवार जैसे जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित कर सकता है. गरुड़ पुराण और अन्य ज्योतिष ग्रंथ पंचक के दौरान सावधानी बरतने की सलाह देते हैं. इस अवधि के दौरान किए गए कार्यों का प्रभाव लंबे समय तक रह सकता है. ऐसा कहा जाता है कि अगर पंचक योग के दौरान किसी की मृत्यु हो जाती है, तो 5 और लोगों की मृत्यु की खबर सुनने को मिलती है. इस संबंध में अंतिम संस्कार के दौरान विशिष्ट अनुष्ठान भी किए जाते हैं. ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे.
पंचक के दौरान ये कार्य वर्जित हैं
राजपंचक में किए जा सकते हैं ये कार्य
1-राजपंचक के दौरान कुछ काम करना शुभ माना जाता है. आइए जानें इस दौरान कौन से काम किए जा सकते हैं.
2-धनिष्ठा और शतभिषा नक्षत्र में यात्रा करना शुभ माना जाता है. रेवती नक्षत्र में व्यापारिक लेन-देन या विवादों का निपटारा करना लाभकारी हो सकता है. इस अवधि में गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन और हनुमान जी की पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं.
पंचक के प्रकार जानें
रोग पंचक (रविवार) : इस अवधि में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं. बीमारियों का खतरा है, इसलिए स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
राजपंचक (सोमवार) : सोमवार को शुरू होने वाला पंचकाल राजपंचक कहलाता है. इसे कुछ हद तक शुभ माना जाता है. इस दिन संपत्ति खरीदना या सरकारी काम करना संभव है. इस अवधि में शुभ कार्य भी वर्जित होते हैं.
अग्नि पंचक (मंगलवार): मंगलवार को शुरू होने वाले पंचकाल को अग्नि पंचक कहते हैं. इस पंचक के दौरान अग्नि से संबंधित कार्य जैसे कि रसोई बनाना या अग्नि से संबंधित यज्ञ करना आदि नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे दुर्घटना होने का खतरा रहता है.
जल पंचक (बुधवार) : जल पंचक बुधवार से शुरू हो रहा है. इस दौरान पानी से जुड़ी गतिविधियाँ जैसे नदियों में नहाना, बड़े जलाशयों में जाना या बोरवेल खोदना खतरनाक हो सकता है. इस दौरान बाढ़ या जल जनित बीमारियों का खतरा रहता है.
चोर पंचक (गुरुवार और शुक्रवार) : गुरुवार और शुक्रवार को शुरू होने वाले पंचक को चोर पंचक कहते हैं. इस दौरान चोरी, धन हानि या विश्वासघात की संभावना बढ़ जाती है. इस दौरान व्यापार, निवेश और बड़े लेन-देन में सावधानी बरतें.
मृत्युपंचक (शनिवार): शनिवार को शुरू होने वाला यह पंचक सबसे अशुभ माना जाता है. इस दौरान दुख या मृत्यु जैसी गंभीर समस्या आ सकती है और सभी शुभ कार्य पूरी तरह वर्जित होते हैं.
(Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और लोक मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए इस खबर की पुष्टि नहीं करता है.)
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.