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Basant Panchami Puja Vidhi: विधि से लेकर सामग्री तक, जानें बसंत पंचमी पर कैसे करें मां सरस्वती की पूजा

 Basant Panchami Puja Niyam: बसंत पंचमी के दिन विधि-विधान से मां सरस्वती की पूजा की जाती है. ऐसे में आइए जानते हैं क्या पूजा की विधि और पूजा में किन सामग्रियों की पड़ती है जरूरत...

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Basant Panchami Puja Vidhi: विधि से लेकर सामग्री तक, जानें बसंत पंचमी पर कैसे करें मां सरस्वती की पूजा

Basant Panchami Puja Vidhi

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Basant Panchami Rituals- हिंदू धर्म में बसंत पंचमी का खास पर्व मां सरस्वती की पूजा और सरस्वती जयंती के रूप में मनाया जाता है. हर साल बसंत पंचमी का त्योहार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने से विद्या और बुद्धि की प्राप्ति होती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार बसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती प्रकट हुई थीं. इसलिए इस दिन विधि-विधान से मां सरस्वती की पूजा की जाती है. ऐसे में आइए जानते हैं क्या पूजा की विधि और पूजा में किन सामग्रियों की पड़ती है जरूरत...

पूजा सामग्री 
बसंत पंचमी के लिए पीले रंग का खास महत्व बताया गया है, इसलिए पूजा में पीले रंग के फूल जरूर शामिल करने चाहिए. इसके अलावा, लकड़ी की चौकी, पीले रंग के फूलों की माला, पीले रंग का कपड़ा बिछाने के लिए, पके हुए केले की फली का पिष्टक, गाय का घी, भोग के लिए मालपुआ, दूध से बनी बर्फी, एक कलश, पीले रंग की साड़ी और चुनरी, खोया का श्वेत मिष्ठान, अक्षत, पीला वस्त्र, सफेद तिल के लड्डू, रोली, सिंदूर, आम का पत्ता, कुमकुम, इत्र, धूपबत्ती और हल्दी  अलग पूजा के लिए रख लें. 

पूजा विधि
बसंत पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और फिर पीले वस्त्र धारण करें, इसके बाद पूजा स्थल पर एक चौकी रखकर पीला वस्त्र बिछाएं और उस पर माता सरस्वती का चित्र या प्रतिमा रखें. फिर कलश स्थापित कर, भगवान गणेश और नवग्रह का पूजन कर मां सरस्वती की विधिपूर्वक पूजा करें. 

माता के मंत्र और श्लोकों का जाप करें. इस दिन सरस्वती चालीसा और सरस्वती वंदना पढ़ना बेहद शुभ माना गया है. इसके अलावा माता को पीले मिष्ठान का भोग जरूर लगाएं. आखिर में आरती करके प्रसाद सभी में बांट दें. 

जरूर करें ये काम 
बसंत पंचमी के दिन पूजा के स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखना न भूलें, इसके अलावा इस दिन चाहे थोड़ी ही देर मगर बच्चों को पूजा स्थल पर बैठाकर माता सरस्वती के किसी न किसी मंत्र का जाप जरूर कराएं. देवी सरस्वती को गुलाब अर्पित जरूर करें  और फिर गुलाल से एक-दूसरे को टीका जरूर लगाएं. 

Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.)

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