धर्म
रामायण में हनुमानजी से जुड़ा एक प्रसंग है, जिसमें सिंदूर के महत्व को बताया गया है. जब हनुमानजी को सीता से सिंदूर का महत्व पता चला तो उन्होंने अपने पूरे शरीर और चेहरे पर सिंदूर लगा लिया.
ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर में कई आतंकवादी शिविरों पर हमला करके आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान को करारा जवाब दिया. पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद कई बहनों-बेटियों के सिंदूर जला दिए गये. ऐसे में सिंदूर के महत्व से जुड़ा 'ऑपरेशन सिंदूर' का नाम सुनकर कई लोग भावुक हो रहे हैं. यदि सिंदूर को धार्मिक आस्था के संदर्भ में देखा जाए तो यह सिर्फ विवाहित महिलाओं के लिए श्रृंगार का सामान नहीं बल्कि एक अटूट आस्था भी है. रामायण में सिंदूर से संबंधित एक कथा है, जब सीता माता ने हनुमानजी को सिंदूर के विशेष गुणों के बारे में बताया तो हनुमानजी ने स्वयं सिंदूर लगाया. आइये रामायण में सिंदूर के धार्मिक महत्व और इससे जुड़ा किस्सा जानते हैं...
रामायण में वर्णित कथा के अनुसार जब श्री राम, लक्ष्मण और सीताजी वनवास से लौटे तो श्री राम अयोध्या का राज्य सुचारू रूप से चला रहे थे. हनुमानजी श्रीराम, लक्ष्मण और सीताजी के बीच हुए संघर्ष के साक्षी थे. श्री राम के लौटने पर आनंद काफी समय के बाद अयोध्या लौटे. इस समय भगवान राम के परम भक्त और घनिष्ठ मित्र हनुमान जी को भगवान राम के दर्शन की इच्छा हुई तो उन्होंने माता सीता से प्रश्न पूछा, माता! भगवान श्री राम को क्या पसंद है? मेरा मतलब है, उसे सबसे ज्यादा खुशी किस बात से मिलती है?” हनुमानजी का यह प्रश्न सुनकर माता सीता हंस पड़ीं.
सीता की माँ ने हनुमानजी से कहा - "प्रभु श्री राम को किसी भी भौतिक वस्तु से इतनी आसक्ति नहीं है. उनके लिए प्रकृति का हर प्राणी एक समान है. वे हर जीव को देखकर प्रसन्न होते हैं. प्रेम और समर्पण की भावना देखकर प्रभु श्री राम प्रसन्न होते हैं." जब सीता हनुमानजी के प्रश्न का उत्तर दे रही थीं, तब वे विदाई स्वरूप सिंदूर भी लगा रही थीं. जब हनुमान की नजर सिन्दूर पर पड़ी तो उन्होंने सीता से पूछा कि उन्होंने विदाई में क्या पहना है. इस का क्या महत्व है?
सीता माता ने मुस्कुराते हुए कहा, "यह सिंदूर है. इसे लगाने से भगवान श्री राम की आयु लंबी होगी. उनकी सुख-समृद्धि भी बढ़ेगी, इसीलिए मैं अपने बालों के बीच में सिंदूर लगाती हूँ." माता सीता की ये बातें सुनकर हनुमानजी प्रसन्न हुए और बोले, "क्या इस चुटकी भर सिंदूर को लगाने से प्रभु श्री राम प्रसन्न होंगे?" हनुमानजी का भोलापन देखकर माता सीता मुस्कुराईं और बोलीं, "हां! प्रभु श्री राम मेरी मांग का सिंदूर देखकर बहुत प्रसन्न हैं."
माता सीता की बातें सुनकर हनुमानजी ने सोचा कि जिस प्रकार भगवान श्री राम की आयु बढ़ती है और उन्हें एक चुटकी सिंदूर लगाने से वे प्रसन्न हो जाते हैं, उसी प्रकार अधिक सिंदूर लगाने से उनकी प्रसन्नता और मिलने वाले लाभ में भी वृद्धि होगी. ऐसा विचार करते हुए अगले दिन हनुमानजी मांग में सिन्दूर लगाकर अयोध्या के राज दरबार में पहुंचे. हनुमान को इस तरह देखकर जब माता सीता और भगवान श्री राम ने इसका कारण पूछा तो हनुमानजी ने माता सीता द्वारा कही गई बात को भगवान श्री राम के सामने दोहराया. हनुमानजी की भक्ति देखकर भगवान श्री राम ने उन्हें गले लगा लिया.
रामायण में वर्णित कथा के अनुसार हनुमानजी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा तभी से चली आ रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लाल सिंदूर वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है. वहीं नारंगी सिंदूर को भक्ति के प्रतीक के रूप में भी जाना जाता है, यही वजह है कि रामजी के प्रति भक्ति और समर्पण दिखाने के लिए हनुमानजी को नारंगी सिंदूर चढ़ाया जाता है. नारंगी सिंदूर को कई जगहों पर पीला सिंदूर भी कहा जाता है.
Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है, जो लोक कथाओं और मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टी नहीं करता है)
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