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Napunsak Yog: कुंडली में ऐसे योग होने पर व्यक्ति हो सकता है नपुसंक, जानिए क्या है इसका कारण व उपाय

Napunsak Yog: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में ऐसा योग भी बनता है जिसके प्रभाव से नपुंसकता आती है. आइए जानते हैं इसके बारे में. 

Napunsak Yog: कुंडली में ऐसे योग होने पर व्यक्ति हो सकता है नपुसंक, जानिए क्या है इसका कारण व उपाय

कुंडली में ऐसे योग होने पर व्यक्ति हो सकता है नपुसंक

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डीएनए हिंदी: सनातन धर्म में बच्चे के जन्म के बाद कुंडली (Janam Kundali) तैयार की जाती है, यह कुंडली नक्षत्रों और ग्रहों की स्थिति आदि देख कर तैयार की जाती है. सनातन धर्म में शादी विवाह आदि कार्य बिना कुंडली देखे नहीं की जाती है. विवाह करते समय कुंडली में लड़का और लड़की के कितने गुण मिलते हैं. यह देख कर रिश्ता तय होता है. इसके अलावा ग्रहों के अनुसार ही व्यक्ति में कामवासना और नपुंसकता (Napunsak Yog In Kundali) हो सकती है. दरअसल कुंडली के 7वें और 8वें भाव को यौन संबंधों के लिए जाना जाता है. ऐसे में कुंडली में ये दोनों घर सही नहीं है तो जातक में नपुंसकता आ सकती है. 

यह ग्रह होते हैं कारण 

सभी 9 ग्रहों में बुध, शनि और केतु को नपुंसक ग्रहों की श्रेणी में रखा गया है. कुंडली में ये ग्रह अपनी स्थिति के आधार पर पुरुष और स्त्री में नपुंसक गुणों को प्रकट करते हैं. ज्योतिष शास्त्र में 12 राशियों को आदमी और औरत में बांटा गया है. जिसमें से मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु और कुंभ पुरुष राशिया हैं और वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर और मीन स्त्री राशियां हैं. ऐसे में जब स्त्री ग्रह पुरुष राशि में आते हैं और पुरुष ग्रह स्त्री राशि में आते हैं. इस स्थिति में वे लोगों को कई तरह से प्रभावित करते हैं. 

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कैसे होता है नपुंसक योग का निर्माण 

- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिस जातक की कुंडली में राहु या शनि दूसरे भाव, बुध 8वें भाव और चंद्रमा 12वें भाव में हो तो शारीरिक कमजोरी के कारण नपुंसकता आ सकती है. 

- वहीं, अगर कुंडली में चंद्रमा जिस भाव में हो और उसके दोनों ओर शनि, राहु, केतु और मंगल ग्रह हों तो पाप कर्तरी योग का निर्माण होता है. कुंडली के अष्टम भाव में शनि, केतु या बुध पाप ग्रह है, ऐसे में व्यक्ति यौन इच्छा खो सकता है. 

- इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में अष्टम भाव में केवल बुध हो या उस पर देव गुरु बृहस्पति, शुक्र और चंद्रमा की दृष्टि न हो तो जातक में हीन भावना पैदा हो सकती है. 

- व्यक्ति की कुंडली में शुक्र के साथ शनि या राहु बैठा हो तो यौन शक्ति की कमी पैदा हो सकती है.

- इसके अलावा राहु-केतु में से कोई एक ग्रह कुंडली में 8वें भाव में है और उसके साथ शुक्र या चंद्रमा में से कोई एक ग्रह है, तो नपुंसकता की संभावना होती है. 

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उपाय

- अगर किसी व्यक्ति के जीवन में इस प्रकार की स्थिति पैदा हो तो सबसे पहले किसी डॉक्टर से सलाह लें.

- इसके अलावा किसी व्यक्ति की कुंडली में यह योग बनता है तो उसे सूर्य देव की उपासना करें.

-  प्रतिदिन सुबह उठकर सूर्य देव को अर्घ्य दें.

- खान-पान पर विशेष ध्यान दें. 

- प्रतिदिन योग जरूर करें

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.) 

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