धर्म
पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने के साथ ही व्रत रखने से भी शुभ फलों की प्राप्ति भक्तों को होती है. आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है.
Ashadha Purnima 2025: हिंदू धर्म में आषाढ़ माह का बड़ा महत्व है. आषाढ़ में आने वाली पूर्णिमा तिथि को बेहद विशेष माना जाता है. इस दिन स्नान-दान के साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक कार्य करना बेहद शुभ और लाभदायक होता है. पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने के साथ ही व्रत रखने से भी शुभ फलों की प्राप्ति होती है. आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसी दिन गुरु वेदव्यास जी का जन्म हुआ था. आइए जानते है कि आषाढ़ पूर्णिमा की सही तारीख से लेकर स्नान दान और शुभ मुहूर्त क्या है...
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह की चतुर्दशी तिथि का समापन 9 जुलाई 2025 की रात 1 बजकर 39 मिनट पर होगा. इसके साथ ही पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 9 जुलाई 2025 को शाम 6 बजकर 59 मिनट पर होगी. वहीं इसका समापन 10 जुलाई 2025 को देर रात 2 बजकर 8 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि में 10 जुलाई 2025 को आषाढ़ पूर्णिमा रहेगी. वहीं इस दिन स्नान और दान का शुभ समय सुबह 5 बजे से लेकर 9 बजे तक रहेगा.
पूर्णिमा तिथि के दिन चंद्रमा पूर्ण रूप में होते हैं. यही वजह है कि पूर्णिमा पर धार्मिक कार्य करना बेदह शुभ होता है. इस दिन योग, ध्यान, स्नान और आध्यात्मिक अनुष्ठान से लाभ की प्राप्ति होती है. यह दिन जप, तप, स्नान, दान के लिए भी बेहद लाभदायक माना गया है. इसके साथ ही आषाढ़ पूर्णिमा के दिन गुरु की पूजा करने से भी लाभ होता है. इस दिन धन का दान कर सकते हैं.
आषाढ़ पूर्णिमा के दिन न सिर्फ देवी देवताओं को बल्कि गुरुओं की पूजा और सेवा भी की जाती है. चिरंजीवियों में से एक वेदव्यास जी का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है. इसके साथ ही गुरु शिष्य परंपरा में इस दिन शिष्य अपने गुरु की पूजा करते हैं. गुरु अपने शिष्य को आशीर्वाद देते हैं. इसीलिए आषाढ़ पूर्णिमा को बेहद खास माना गया है.
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