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Amalaki Ekadashi 2025: मार्च माह में इस दिन है पहली एकादशी, जानें आमलकी एकादशी का महत्व से लेकर शुभ मुहूर्त और लाभ

हर साल फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाता है. इसे आंवला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करना बेहद शुभ होता है.

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Amalaki Ekadashi 2025: मार्च माह में इस दिन है पहली एकादशी, जानें आमलकी एकादशी का महत्व से लेकर शुभ मुहूर्त और लाभ
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हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का बड़ा महत्व है. सभी तिथियों में एकादशी को सबसे बड़ी तिथि माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु जी की पूजा अर्चना और व्रत किया जाता है. हर साल फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाता है. इसे आंवला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करना बेहद शुभ होता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु सृष्टि की रचना कर रहे थे, तब आंवले का वृक्ष प्रकट हुआ था. इस चलते इसे बेहद शुभ और सौभाग्य वाला वृक्ष माना जाता है. आइए जानते हैं आमला एकादशी का महत्व, तिथि से लेकर शुभ मुहूर्त...

इस दिन है आमलकी एकादशी

हिंदू पंचांग के अनुसार, आमलकी एकादशी का व्रत 10 मार्च 2025 को रखा जाएगा. इस दिन भगवान विष्णु की कृपा से व्यक्ति के सभी काम बन जाते हैं. व्रत रखने मनोकामना की पूर्ति होती है.  आमलकी एकादशी के व्रत का पारण अगले दिन 11 मार्च 2025 को सुबह 6 बजकर 35 मिनट से 8 बजकर 13 मिनट के बीच किया जा सकेगा. 

इस बार बन रहे हैं ये शुभ योग 

आमलकी एकादशी पर कई शुभ योग भी बन रहे हैं. इनमें सबसे पहला सर्वार्थ सिद्धि योग है. साथ ही शोभन योग और पुष्प नक्षत्र संयोग का निर्माण हो रहा है. सर्वार्थ सिद्धि योग 10 मार्च 2025 को सुबह 6 बजकर 36 मिनट से शुरू होकर रात 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा शोभन योग सुबह से शुरू होकर दोपहर 1 बजकर 57 मिनट तक रहने वाला है. 

आमलकी एकादशी पर इन बातों का रखें खास ध्यान

- आमलकी एकादशी के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करें. उनका जप और व्रत करें. इस दिन आंवले की पूजा करना अनिवार्य होता है. 

- आमलकी एकादशी के दिन आंवले से बनी चीजों का सेवन बेहद शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि ऐसा करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है. 

- आंवला एकादशी के दिन शकरकंद और कद्दू का सेवन करना बेहद शुभ होता है. इससे सौभाग्य की प्राप्ति होती है. यह वृद्धि के लिए बेहद शुभ माना जाता है. 

- एकादशी के दिन मांस या मदिर का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए. कहते हैं कि ऐसा करना बेहद अशुभ होता है. इस दिन भूलकर भी तामसीक भोजन न करें. साथ ही लहसुन से लेकर मसूर की दाल को बिल्कुल भी अच्छा नहीं माना जाता है. 

न तोड़े तुलसी के पत्ते

एकादशी के दिन पूजा में तुलसी के पत्तों को शामिल करना चाहिए, लेकिन इस दिन भूलकर भी इन्हें तोड़ना नहीं चाहिए. ऐसे में पूजा के लिए पहले से ही तुलसी के पत्तों को तोड़कर रख लें. 

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