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Maharaja Agrasen Jayanti: भगवान राम के वंशज माने जाते हैं महाराजा अग्रसेन, 26 सितम्बर को है जयंती

भगवान राम के वंशज माने जाने वाले Maharaja Agrasen का जन्मोत्सव 26 सितंबर 2022 को है, ऐसे में हम आपको बता रहे हैं उनसे जुड़े कुछ रोचक तथ्य

Maharaja Agrasen Jayanti: भगवान राम के वंशज माने जाते हैं महाराजा अग्रसेन, 26 सितम्बर को है जयंती

महाराजा अग्रसेन से जुड़ी है यह पौराणिक कथा 

 

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डीएनए हिंदी : (Maharaja Agrasen Jayanti 2022) 26 सितंबर 2022 को भगवान राम के वंशज माने जाने वाले महाराजा अग्रसेन का जन्मोत्सव मनाया जाएगा. हर वर्ष आश्विन (Ashwin) शुक्ल प्रतिपदा को महाराजा अग्रसेन की जयंती मनाई जाती है. महाराजा अग्रसेन अग्रवाल (Agrawal) समाज के पितामह और वैश्य समाज के संस्थापक माने जाते हैं(Maharaja Agrasen). इस दिन से ही नवरात्रि का भी शुभारंभ हो रहा है. यहां हम आपके साथ साझा कर रहे हैं महाराजा अग्रसेन (Agrasen Maharaj) से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां. 

कौन थे महाराजा अग्रसेन 

  • महाराजा अग्रसेन को श्री राम का वंशज माना जाता है. कहा जाता है कि महाराजा अग्रसेन  का जन्म द्वापरयुग के अंतिम काल और कलयुग के प्रारंभ में हुआ था. 
  • इनका जन्म राजस्थान और हरियाणा के बीच सरस्वती नदी के किनारे पर स्थित प्रतापनगर में हुआ था. 
  • महाराजा अग्रसेन ने अग्रोहा (Agroha) राज्य की स्थापना की थी.
  • महाराजा अग्रसेन अपने जीवन में तीन आदर्शों लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था, आर्थिक समरूपता और सामाजिक समानता का पालन करते थे. 

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महाराजा अग्रसेन से जुड़ी है यह पौराणिक कथा 

महाराजा अग्रसेन का विवाह नागराज मुकुट की पुत्री माधवी (Madhavi) से हुआ था. वह बचपन से ही पराक्रमी और तेजस्वी थे. एक समय इंद्रदेव के श्राप से महाराजा अग्रसेन के राज्य में सूखा पड़ गया जिससे हर ओर हाहाकार मच गया, राज्य की यह स्थिति देख महाराजा अग्रसेन ने राज्य की खुशहाली और धन संपदा को लौटाने के लिए भगवान शिव और माता लक्ष्मी (Goddess Lakshmi) का तप किया. उनकी कठिन तपस्या से  भगवान शिव और माता लक्ष्मी प्रसन्न हुईं जिससे उनके राज्य में फिर से हरियाली छा गई. माता लक्ष्मी ने उन्हें दर्शन दे कर धन-वैभव प्राप्ति का आशीर्वाद दिया. जहां मां लक्ष्मी ने महाराजा अग्रसेन को तप त्याग कर गृहस्थ जीवन का पालन करने को कहा, साथ ही उन्हें अपने वंश को आगे बढ़ाने को कहा.

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महाराजा अग्रसेन ने की थी 18 गोत्रों की स्थापना

माता लक्ष्मी की सलाह के अनुसार महाराजा अग्रसेन ने नागराज महिस्त  की पुत्री सुंदरावती से दूसरा विवाह किया जिससे उन्हें 18 पुत्रों की प्राप्ति हुई. जिसके बाद उन्होंने वैश्य समाज की स्थापना की जहां उन्होंने अग्रोहा राज्य को 18 भागों में बाट कर 18 गोत्रों की स्थापना की. इन गोत्रों में बंसल, बिंदल, धारण, गर्ग, गोयल, गोयन, जिंदल, कंसल, कुच्छल, मंगल, मित्तल, नागल, सिंघल, तायल और तिंगल आदि शामिल हैं. गौरतलब है कि ये सबलोग महाराजा अग्रसेन को पूजते हैं. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.) 

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