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Reasons for Unsuccessful Life: किन 3 दोष के कारण मनुष्य पाता है दुख और असफलता? श्रीकृष्ण ने बताएं हैं जीवन में तीन प्रमुख दोष

तीन दोष व्यक्ति की सफलता में बाधा डालते हैं. अगर आपमें ये 3 दोष हैं तो दुख और असफलता कभी साथ नहीं छोड़ेंगे, ऐसा भागवत गीता में श्रीकृष्ण ने बताया है.

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Reasons for Unsuccessful Life: किन 3 दोष के कारण मनुष्य पाता है दुख और असफलता? श्रीकृष्ण ने बताएं हैं जीवन में तीन प्रमुख दोष

किन 3 दोष के चलते जीवन में मिलती है असफलता

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सनातन धर्म में अनेक धार्मिक ग्रंथ हैं, लेकिन श्रीमद्भगवद्गीता को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. द्वापर युग में श्री कृष्ण द्वारा दी गई शिक्षाएं आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण और उपयोगी हैं जितनी उस समय थीं. गीता की शिक्षाएं लोगों को जीवन जीने की कला सिखाती हैं. इसीलिए श्रीमद्भगवद्गीता को न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी बहुत महत्व दिया जाता है.

दुनिया में बहुत से लोग श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ना पसंद करते हैं. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति इस पुस्तक को एक बार पढ़ लेता है और इसका अर्थ समझ लेता है, वह जीवन में हर चीज में सकारात्मक और सही रास्ता चुनने में सक्षम हो जाता है. लेकिन श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने मनुष्य के 3 दोषों के बारे में बताया है, जिनके कारण मनुष्य कभी सफल नहीं हो सकता. आइए जानें वे 3 दोष क्या हैं.
 
1) अत्यधिक लगाव

गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं कि जब व्यक्ति किसी वस्तु, विचार या व्यक्ति में बहुत अधिक लिप्त हो जाता है, तो उसकी ऊर्जा और ध्यान उसी पर केंद्रित रहता है और इस अवस्था में वह अपने लक्ष्य से भटक जाता है. इसलिए हम जीवन का अर्थ भूल जाते हैं और अपना समय और दिमाग अन्य कार्यों में लगाते हैं, जो हमारी असफलता का कारण बन जाता है और हम असफल रहते हैं. इसलिए आसक्ति से मुक्त होने के लिए श्री कृष्ण कहते हैं कि हमें उन चीजों से दूर रहना चाहिए जिनमें हम बहुत अधिक लिप्त हैं.
 
2) अहंकार 

श्रीमद्भगवद्गीता में श्री कृष्ण कहते हैं कि अहंकार मनुष्य को विनाश की ओर ले जाता है और यह मनुष्य की बुद्धि को भी भ्रष्ट कर देता है. अहंकार के कारण व्यक्ति किसी के साथ अच्छे और मधुर संबंध नहीं रख पाता और ऐसे लोग कभी भी अपनी गलतियों को स्वीकार नहीं करते, जो उनके लिए बहुत खतरनाक है. क्योंकि जब तक व्यक्ति अपनी गलती स्वीकार नहीं कर लेता, तब तक वह उसे सुधार नहीं सकता. इतना ही नहीं, बल्कि व्यक्ति के अंदर का अहंकार उसे नीचे गिरा देता है और उसे नष्ट कर देता है, जिसके कारण वह कभी सफल नहीं हो पाता, इसलिए कभी भी अहंकारी न बनें.
 
3) आलस्य

आलस्य एक ऐसी बुराई है जो व्यक्ति को कभी आगे बढ़ने नहीं देती. आलसी व्यक्ति अपना काम कल पर टालता रहता है और यही आदत उसकी असफलता का कारण बन जाती है. भगवद गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं कि आलस्य व्यक्ति को कभी सफल नहीं होने देता, क्योंकि आलसी व्यक्ति केवल आराम करना चाहता है और हर काम से बचता है. लेकिन सफलता उन लोगों को मिलती है जो कड़ी मेहनत करते हैं, क्योंकि वे समय पर काम कर सकते हैं. गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं कि आलसी व्यक्ति को कभी खुशी नहीं मिलती. इसलिए आलस्य को त्यागें और आगे बढ़ें.

Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.) 

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