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Numerology: जले पर नमक छिड़कने वाले होते हैं ये 3 मूलांक, मासूम और केयरिंग बनकर भी जख्म कुरेदने में होते हैं माहिर

अक्सर अपने ही आपकी कमजोर नस पकड़ लेते हैं और बातों-बातों में आपके दुख या दर्द को कुरदते रहते हैं. कई बार आपको समझ भी न आए कि ये मजाक था या ताना. न्यूमेरोलॉजी में कुछ मूलांक के लोग जाने-अनजाने अक्सर दूसरों की दुखती रग पर हाथ रखते हैं और इसका असर रिश्तों पर गहरा पड़ता है.

ऋतु सिंह | May 16, 2026, 07:06 AM IST

1.क्यों चुभती हैं इन लोगों की बातें

क्यों चुभती हैं इन लोगों की बातें
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हर व्यक्ति का व्यवहार उसके जन्मांक यानी मूलांक से प्रभावित माना जाता है और कुछ मूलांक ऐसे होते हैं जिनमें सामने वाले की सोच और कमजोरियों को जल्दी समझने की क्षमता बहुत तेज होती है, लेकिन यही समझ कई बार संवेदनशीलता की जगह कटुता में बदल जाती है और उनकी साधारण सी लगने वाली बातें भी सामने वाले के दिल को गहराई से चोट पहुंचा देती हैं. (फोटो एआई)
 

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2.इन मूलांक के लोग क्यों रखते हैं दुखती रग पर हाथ?

इन मूलांक के लोग क्यों रखते हैं दुखती रग पर हाथ?
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न्यूमेरोलॉजी में मूलांक 4, 5 और 7 के लोगों को इस स्वभाव से जोड़ा जाता है, जहां मूलांक 4 के लोग सीधे और स्पष्ट बोलने वाले होते हैं और बिना सोचे सच कह देते हैं, मूलांक 5 के लोग चतुर और संवाद में निपुण होते हैं जो मजाक के अंदाज में भी गहरी बात कह जाते हैं, जबकि मूलांक 7 के लोग गहराई से सोचने वाले होते हैं और अनजाने में सामने वाले की कमजोर नस पकड़ लेते हैं. (फोटो एआई)
 

3.भोलेपन के पीछे छुपा होता है दबा हुआ भाव

भोलेपन के पीछे छुपा होता है दबा हुआ भाव
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अक्सर देखने में यह लोग शांत और भोले लगते हैं लेकिन उनके अंदर कई बार दबे हुए अनुभव, असुरक्षा या अनकही भावनाएं होती हैं जो सीधे तरीके से बाहर नहीं आतीं बल्कि बातों के जरिए सामने आती हैं और यही वजह है कि उनकी कही गई बात अचानक ज्यादा चुभने लगती है. (फोटो एआई)
 

4.रिश्तों पर क्या पड़ता है असर?

रिश्तों पर क्या पड़ता है असर?
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लगातार इस तरह की बातों से रिश्तों में धीरे-धीरे दूरी आने लगती है, लोग सामने से सामान्य व्यवहार करते हैं लेकिन भीतर ही भीतर असहज महसूस करने लगते हैं और कई बार ऐसा रिश्ता बाहर से ठीक दिखता है लेकिन अंदर से कमजोर और खाली हो जाता है. (फोटो एआई)

5.कैसे संभालें ऐसे लोगों के साथ रिश्ता?

कैसे संभालें ऐसे लोगों के साथ रिश्ता?
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ऐसी स्थिति में सबसे जरूरी है अपनी भावनाओं को समझना और उन्हें नजरअंदाज न करना, साथ ही सामने वाले को शांत तरीके से यह बताना कि कौन सी बातें आपको चोट पहुंचा रही हैं और जरूरत पड़ने पर अपने लिए सीमाएं तय करना ताकि मानसिक संतुलन बना रहे. (फोटो एआई)
 

6.ये बात समझ लें

ये बात समझ लें
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न्यूमेरोलॉजी हमें सिर्फ दूसरों को समझने का तरीका नहीं देती बल्कि यह भी सिखाती है कि हर रिश्ते में संवेदनशीलता और समझ कितनी जरूरी है क्योंकि कभी-कभी बिना इरादे के कही गई बातें भी गहरे घाव छोड़ जाती हैं और अगर समय रहते उन्हें समझा न जाए तो यही छोटी बातें रिश्तों को अंदर से तोड़ सकती हैं. (फोटो एआई)

डिस्क्लेमर- यह जानकारी अंक सामान्य ज्योतिष और ग्रह- नक्षत्रों  के आधार पर लिखी गई है. जरूरी नहीं की सबका अनुभव एक सा हो. ग्रहों और कुंडली से भी परिणाम बदल जाते हैं. अधिक जानकारी के लिए ज्योतिषाचार्य से संपर्क करें

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