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Mysterious Temple: इस मंदिर में छिपा है पृथ्वी के ‘आरंभ और अंत’ का रहस्य! चारों युगों से है अद्भुत कनेक्शन

भारत में कई ऐसे रहस्यमयी मंदिर मौजूद हैं, जिनके पीछे अद्भुत कहानियां और अनसुलझे रहस्य छिपे हैं. आज हम आपको ऐसे ही एक मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका कनेक्शन पृथ्वी के ‘आरंभ और अंत’ से जुड़ा है, मान्यता है कि इस मंदिर में मौजूद 4 स्तंभ सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग के प्रतीक हैं...

Abhay Sharma | Dec 08, 2025, 12:01 PM IST

1.केदारेश्वर गुफा मंदिर

केदारेश्वर गुफा मंदिर
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महाराष्ट्र के हरिश्चंद्रगढ़ किले में स्थित केदारेश्वर गुफा मंदिर इन्हीं रहस्यमयी मंदिरों में से एक है. माना जाता है कि पृथ्वी की शुरुआत इसी मंदिर से हुई थी और अंत भी इसी मंदिर में होगा. इस मंदिर में बने स्तंभ कलयुग के अंत का संकेत देते हैं. मान्यता है कि मंदिर के चार स्तंभ सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग के प्रतीक हैं. 

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2.सालभर भरा रहता है पानी

सालभर भरा रहता है पानी
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बता दें कि इस मंदिर की कोई वास्तुकला नहीं है और न ही मंदिर को भव्य बनाने में किसी तरह खर्च किया गया है, फिर भी भक्त दूर-दूर से भगवान शिव के केदारेश्वर रूप के दर्शन के लिए आते हैं. मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जहां साल भर पानी भरा रहता है.  मंदिर के चारों ओर भरा पानी भी मौसम के अनुसार अपना तापमान बदलता रहता है. सर्दियों में पानी गुनगुना और गर्मियों में बर्फ जितना ठंडा हो जाता है. 

3.टूट चुके हैं मंदिर के तीन स्तंभ 

टूट चुके हैं मंदिर के तीन स्तंभ 
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मंदिर के तीन स्तंभ टूट चुके हैं और एक ही बाकी है. कहा जाता है कि बचा हुआ स्तंभ कलयुग का प्रतीक है, जब कलयुग खत्म होगा, तब यह स्तंभ भी टूटकर गिर जाएगा और पृथ्वी का विनाश हो जाएगा. 

4.मंदिर तक पहुंचने का रास्ता है कठिन

मंदिर तक पहुंचने का रास्ता है कठिन
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मंदिर तक पहुंचने का रास्ता बहुत दुर्गम है, जो पहाड़ियों से होकर गुजरता है. मंदिर तक पहुंचने का कोई पक्का रास्ता भी नहीं बना है. पहाड़ी पर ट्रेकिंग के जरिए ही मंदिर तक पहुंचा जाता है. 

5.भगवान शिव की स्वयंभू शिवलिंग  

भगवान शिव की स्वयंभू शिवलिंग  
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इस मंदिर की गुफा के बीच में 5 फीट का शिवलिंग विराजमान है. माना जाता है कि शिवलिंग स्वयंभू है और भगवान शिव स्वयं तपस्या के बाद यहां प्रकट हुए थे.  गुफा के ऊपर मंदिर का गोपुरम बना है, जिसका निर्माण पत्थर की सहायता से किया गया. 

6.आकर्षक है मंदिर के आसपास का नजारा

आकर्षक है मंदिर के आसपास का नजारा
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बताते चलें कि इसका निर्माण छठी शताब्दी में कलचुरी राजवंश ने किया था. 11वीं सदी में गुफाओं की खोज हुई. मंदिर के आसपास प्रकृति का अनोखा नजारा देखने को मिलता है, जो भक्तों को अपनी तरफ आकर्षित करता है. इनपुट--आईएएनएस

यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. डीएनए  इसकी पुष्टि नहीं करता.

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