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Mahashivratri Rudrabhishek Samay: महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक का सबसे शुभ समय कब है? पूजा के 4 प्रहर, भद्रा काल के साथ सही विधि और नियम जानें

Mahashivratri Rudrabhishek Time: जानिए महाशिवरात्रि 2026 पर रुद्राभिषेक का शुभ समय, चार प्रहर पूजा मुहूर्त, भद्रा काल, पूजा विधि और सामग्री सूची. शिवजी की कृपा पाने का सही समय और नियम पढ़ें.

ऋतु सिंह | Feb 14, 2026, 11:16 AM IST

1.महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी

महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी
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Mahashivratri 2026 Rudrabhishek Time: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र अवसर माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन रुद्राभिषेक करने से पापों का नाश, मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. साल 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी. जानिए रुद्राभिषेक का शुभ समय, अशुभ भद्रा काल, चार प्रहर पूजा मुहूर्त, पूजा सामग्री और सही विधि के बारे में चलिए विस्तार से जानें.

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2.महाशिवरात्रि 2026 पर रुद्राभिषेक का शुभ समय

महाशिवरात्रि 2026 पर रुद्राभिषेक का शुभ समय
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ज्योतिष गणना के अनुसार,15 फरवरी शाम 5:04 बजे से 16 फरवरी सुबह 6:59 बजे तक रुद्राभिषेक के लिए अत्यंत शुभ समय रहेगा.इस दौरान शिवलिंग पर जल, दूध या पंचामृत से अभिषेक करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है.
 

3.महाशिवरात्रि चार प्रहर पूजा मुहूर्त 2026

महाशिवरात्रि चार प्रहर पूजा मुहूर्त 2026
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पहला प्रहर: 15 फरवरी, शाम 6:11 बजे – रात 9:23 बजे
दूसरा प्रहर: 15 फरवरी, रात 9:23 बजे – 16 फरवरी, रात 12:35 बजे
तीसरा प्रहर: 16 फरवरी, रात 12:35 बजे – सुबह 3:47 बजे
चौथा प्रहर: 16 फरवरी, सुबह 3:47 बजे – सुबह 6:59 बजे

महाशिवरात्रि की रात चार प्रहरों में शिव पूजा का विशेष महत्व होता है.  शास्त्रों के अनुसार, चारों प्रहर में पूजा करने से महापुण्य फल मिलता है, लेकिन कम से कम निशिता काल (तीसरा प्रहर) की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है.
 

4.रुद्राभिषेक के लिए पूजा सामग्री सूची

रुद्राभिषेक के लिए पूजा सामग्री सूची
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गंगाजल और स्वच्छ जल, दूध, दही, घी, शहद और गन्ने का रस (पंचामृत), गुलाब जल, पान के पत्ते, नारियल, कपूर, दीपक, अगरबत्ती, चंदन, अक्षत, पुष्प, धतूरा फल, बेलपत्र, मिठाई और फल
 

5.रुद्राभिषेक करने की सही विधि

रुद्राभिषेक करने की सही विधि
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सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें. फिर पूजा सामग्री को शुद्ध करें और संकल्प लें. इसके बाद सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें फिर कार्तिकेय, नंदी और देवी पार्वती की पूजा करें. फिर शिवलिंग पर कलश या लोटे से जलधारा अर्पित करें और दूध, दही, घी या पंचामृत से अभिषेक करें. इसके बाद “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. अंत में चंदन, पुष्प, फल और मिठाई अर्पित कर क्षमा प्रार्थना करें.
 

6.भद्रा काल का प्रभाव 2026 में

भद्रा काल का प्रभाव 2026 में
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 2026 में महाशिवरात्रि पर भद्रा काल का प्रभाव रहेगा.
भद्रा काल की शुरुआत 15 फरवरी शाम 5:04 बजे से होगी और अगले दिन  16 फरवरी सुबह 5:23 बजे तक रहेगी.

भद्रा काल को शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है, लेकिन रुद्राभिषेक, मंत्र जाप और शिव पूजा पर भद्रा का प्रभाव नहीं पड़ता. इसलिए भक्त निर्भय होकर पूजा कर सकते हैं.

7.रुद्राभिषेक का आध्यात्मिक महत्व

रुद्राभिषेक का आध्यात्मिक महत्व
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शिव पुराण के अनुसार, रुद्राभिषेक करने से मानसिक शांति मिलती है और रोग और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. साथ ही धन, सफलता और सुख-समृद्धि का योग बनता है. इसके साथ ही पूर्व जन्म के दोषों से मुक्ति मिलती है.

महाशिवरात्रि 2026 पर रुद्राभिषेक का सबसे शुभ समय 15 फरवरी शाम से 16 फरवरी सुबह तक रहेगा. चार प्रहर पूजा का विशेष महत्व है और भद्रा काल शिव पूजा के लिए बाधक नहीं है. यदि विधि-विधान से अभिषेक और मंत्र जाप किया जाए, तो भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

डिस्क्लेमर- यह जानकारी सामान्य ज्योतिष के आधार पर लिखी गई है. अधिक जानकारी के लिए ज्योतिषाचार्य से संपर्क करें.

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