धर्म
Abhay Sharma | Jul 12, 2025, 08:42 PM IST
1.महाकाल की सवारी

पंचांग की गणना के साथ हर साल सावन और भाद्रपद के महीने में उज्जैन में महाकाल की सवारी निकाली जाती है, इसे ही बाबा महाकाल की सवारी कहा जाता है. ये सवारी उत्सव और बेहद धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं.
2.क्या है इतिहास?

कहा जाता है इस सवारी को राजा भोज ने बड़े रूप में शुरू किया था, जिसमें नए रथ और हाथी शामिल किए थे. हर साल सावन और भाद्रपद के महीने में निकलने वाली महाकाल की विशेष सवारी को आज भी प्राचीन परंपरा के साथ विधिपूर्वक निकाला जाता है.
3.कब-कब निकलेगी सवारी?

महाकाल की पहली सवारी 14 जुलाई को, दूसरी सवारी- 21 जुलाई, तीसरी सवारी- 28 जुलाई, चौथी सवारी - 4 अगस्त, पांचवी सवारी- 11 अगस्त, और छठी सवारी- 18 अगस्त को निकाली जाएगी. इस दौरान महाकाल जी को रथ में बैठा कर नगर का भ्रमण कराया जाता है.
4.सवारी का है धार्मिक महत्व

महाकाल की सवारी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, इस सवारी के दौरान भक्त महाकाल के जयकारे लगाते हैं और ढोल नगाड़े बजाए जाते हैं. इसके अलावा इस उत्सव में शामिल होने के लिए भक्त बेसब्री से इंतजार करते हैं. दूर-दराज से लोग इसमें शामिल होने उज्जैन पहुंचते हैं.
5.होती है तलवारबाजी और घुड़सवारी

इस यात्रा में तलवारबाज और घुड़सवार भी शामिल होते हैं. इस सवारी को महाकाल की शक्ति और महिमा का प्रतीक माना जाता है. इतना ही नहीं महाकाल की सवारी का वर्णन ग्रंथों में भी देखने को मिलता है.