धर्म
ऋतु सिंह | May 25, 2025, 10:09 AM IST
1.कृष्ण की तीसरी आंख क्या है?

महाभारत युद्ध में दो अवसर ऐसे आए जब कृष्ण ने अपनी तीसरी आंख खोली और पांडवों को होने वाले विनाश से बचा लिया. अब आप सोच रहे होंगे कि कृष्ण की तीसरी आंख क्या है? और वे दो समय कौन से थे जब देवकीनंदन को अपनी तीसरी आंख खोलनी पड़ी थी? कृष्ण द्वारा अपनी तीसरी आँख खोलने की घटना कर्ण पर्व में घटती है, जब वे अर्जुन को अपना विशाल रूप दिखाते हैं.
2.…और फिर कृष्ण ने अपनी तीसरी आंख खोली

जब कर्ण और अर्जुन के बीच युद्ध शुरू हुआ, तो कर्ण के पास इंद्र द्वारा दिया गया एक शक्तिशाली हथियार था, जिसका उपयोग वह अर्जुन पर करने वाला था. कृष्ण जानते थे कि यह अस्त्र अर्जुन के लिए घातक हो सकता है. ऐसा कहा जाता है कि तब कृष्ण ने अपनी तीसरी आंख खोली, जिसे दिव्य नेत्र कहा जाता है. जैसे ही उसने अपनी आंखें खोलीं, एक चमकदार रोशनी बाहर आई. इससे कर्ण का ध्यान भंग हुआ और अर्जुन को जान बचाने का अवसर मिल गया.
3.कृष्ण की तीसरी आंख ब्रह्मांडीय शक्ति और दिव्य ज्ञान का प्रतीक है

इस क्षण का लाभ उठाया और जब कर्ण विचलित था, अर्जुन ने कर्ण पर हमला कर दिया और कर्ण मारा गया. लेकिन यदि कर्ण ने उस दिन उस अस्त्र का प्रयोग किया होता तो शायद अर्जुन जीवित नहीं बचते. कहा जाता है कि कृष्ण की तीसरी आंख ब्रह्मांडीय शक्ति और दिव्य ज्ञान का प्रतीक है.
इस घटना में कृष्ण अपने विष्णु रूप में प्रकट हुए, जिससे कर्ण सहित सभी योद्धा आश्चर्यचकित हो गए. इस समय भगवान कृष्ण ने अपना भव्य दिव्य रूप दिखाया. यद्यपि अर्जुन को यह बात पहले ही समझ आ गई थी, किन्तु युद्ध में इस दिव्य दर्शन के बाद अर्जुन को एहसास हुआ कि कृष्ण केवल सारथी नहीं, बल्कि भगवान थे.
4.जब अश्वत्थामा पर क्रोधित हुए थे कृष्ण

ऐसा ही एक प्रसंग महाभारत में अश्वत्थामा और कृष्ण के बीच घटित हुआ था, जहां कुछ कहानियों में उल्लेख है कि कृष्ण ने अपनी तीसरी आंख खोली थी. यह घटना सौप्तिक पर्व (रात्रि नरसंहार) के बाद घटित हुई, जब अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र छोड़कर पांडव वंश को नष्ट करने का प्रयास किया. सबसे पहले अश्वत्थामा ने पांडव शिविर में प्रवेश किया और शिखंडी तथा पांचों पांडव पुत्रों का वध कर दिया. ऐसा उल्लेख है कि इसके बाद वह वहां से भाग गया.
5.जब अश्वत्थामा के विरुद्ध खुली तीसरी आँख

जब कृष्ण और पांडवों ने उसका पता लगाया, तो उसने उत्तरा के गर्भ में पल रहे राजा परीक्षित को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल किया, जिससे पूरे पांडव वंश का नाश हो गया. यदि यह सही निशाने पर लगती तो पांडव परिवार नष्ट हो जाता. बाद में इसी गर्भ की रक्षा करके उत्तरा के गर्भ से राजा परीक्षित का जन्म हुआ, जो बाद में हस्तिनापुर के राजा बने.
तब कृष्ण को इसे रोकने के लिए अपनी तीसरी आंख खोलनी पड़ी. जब कृष्ण ने अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र को रोकने के लिए अपनी तीसरी आँख खोली तो उसकी ऊर्जा से पृथ्वी कांप उठी.
6. ब्रह्मांडीय ऊर्जा ने अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र को निष्क्रिय कर दिया

महाभारत, हरिवंश पुराण और क्षेत्रीय लोककथाओं में भी कृष्ण द्वारा अपनी दिव्य शक्तियों को प्रकट करने और अपनी तीसरी आंख खोलने का वर्णन किया गया है. यह भी कहा जाता है कि कृष्ण ने नरकासुर का वध करने के लिए अपनी तीसरी आंख खोली थी.
उनकी तीसरी आंख से निकली ब्रह्मांडीय ऊर्जा ने अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र को निष्क्रिय कर दिया. इसके बाद अश्वत्थामा ने आत्मसमर्पण कर दिया. उन्होंने अपने माथे की मणि कृष्ण को दे दी और चले गये. हालांकि, इसके साथ ही उन्हें पृथ्वी पर हमेशा भटकने तथा कभी मोक्ष न पाने का श्राप कृष्ण ने अश्वस्थामा को दे दिया था.
Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.)
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