Advertisement

शनि जयंती और अमावस्या की शाम जरूर करें ये 4 उपाय, दुख, कर्ज और बाधाएं होंगी दूर, धन-सक्सेस खींची चली आएगी

क्या मेहनत के बाद भी काम अटक जाते हैं? घर में तनाव, पैसों की कमी या करियर में रुकावट पीछा नहीं छोड़ रही? ज्योतिष मान्यताओं में शनि जयंती और अमावस्या की शाम को बेहद शक्तिशाली माना जाता है. कहा जाता है कि इस समय किए गए कुछ छोटे उपाय व्यक्ति की किस्मत और मानसिक स्थिति दोनों पर असर डाल सकते हैं.

ऋतु सिंह | May 16, 2026, 07:34 AM IST

1.शनि जयंती और अमावस्या का संयोग खास

शनि जयंती और अमावस्या का संयोग खास
1

शनि जयंती और अमावस्या आज यानी 16 मई को है और आज की शाम किए गए कुछ पारंपरिक उपायों को ज्योतिष में बेहद प्रभावशाली माना जाता है. इन उपायों को शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या, आर्थिक संकट और मानसिक तनाव कम करने से जोड़कर देखा जाता है. 

इस बार शनि जयंती और अमावस्या का संयोग खास माना जा रहा है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह समय खासतौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है जो शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या, बार-बार असफलता, आर्थिक संकट या मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं. मान्यता है कि शाम के समय किए गए कुछ उपाय नकारात्मक ऊर्जा को कम करने और जीवन में स्थिरता लाने में मदद करते हैं. तो चलिए जाने आज कौन से 4 उपाय जरूर करने चाहिए. (फोटो एआई)

Advertisement

2.पीपल के पेड़ में सरसों के तेल का दीपक क्यों जलाया जाता है?

पीपल के पेड़ में सरसों के तेल का दीपक क्यों जलाया जाता है?
2

शनि जयंती और अमावस्या की शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना बेहद शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि पीपल का संबंध शनि और पितृ ऊर्जा दोनों से जुड़ा होता है. ऐसे में यहां दीपक जलाने से जीवन में अटकी हुई चीजों को गति मिलने की मान्यता है.

उपाय कैसे करें?
शाम के समय स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें. पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और मन ही मन अपनी परेशानी या इच्छा को याद करें. कुछ लोग इस दौरान “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप भी करते हैं.

क्या लाभ माना जाता है?
मान्यता है कि इससे नौकरी में रुकावट, पैसों की तंगी और बार-बार बनते बिगड़ते कामों में राहत मिल सकती है. खासतौर पर जिन लोगों को मेहनत का फल देर से मिलता है, उनके लिए यह उपाय असरदार माना जाता है. (फोटो एआई)
 

3.पीपल के पेड़ में जल चढ़ाने का क्या महत्व है?

पीपल के पेड़ में जल चढ़ाने का क्या महत्व है?
3

अमावस्या और शनि जयंती पर पीपल में जल चढ़ाने को भी शुभ माना जाता है. ज्योतिष में इसे कर्म दोष और मानसिक बेचैनी को कम करने वाला उपाय बताया जाता है.

कैसे करें यह उपाय?
सुबह या शाम तांबे या स्टील के लोटे में जल लेकर पीपल की जड़ में धीरे-धीरे अर्पित करें. जल चढ़ाते समय मन शांत रखें और जल्दबाजी न करें.

इससे क्या फायदा माना जाता है?
मान्यता है कि इससे परिवार में तनाव कम होता है और व्यक्ति के भीतर सकारात्मक सोच बढ़ती है. कई ज्योतिषाचार्य इसे पितृ दोष और शनि दोष से राहत देने वाला उपाय भी मानते हैं. (फोटो एआई)
 

4.शनिदेव के मंदिर में सरसों के तेल का दीपक क्यों जलाते हैं?

शनिदेव के मंदिर में सरसों के तेल का दीपक क्यों जलाते हैं?
4

शनि जयंती पर शनिदेव के मंदिर में जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाना सबसे लोकप्रिय उपायों में से एक माना जाता है. शनि को कर्म और न्याय का ग्रह कहा जाता है, इसलिए यह उपाय व्यक्ति को अपने कर्मों के प्रति सजग रहने का संदेश भी देता है.

कैसे करें यह उपाय?
शाम के समय शनिदेव के मंदिर जाएं. वहां सरसों के तेल का दीपक जलाएं और काले तिल या उड़द दान करना भी शुभ माना जाता है. इस दौरान किसी जरूरतमंद की मदद करना भी लाभकारी माना जाता है.

क्या लाभ हो सकता है?
मान्यता है कि इससे शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं. जिन लोगों को नौकरी में रुकावट, कोर्ट-कचहरी या बार-बार आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा हो, वे इस उपाय को विशेष रूप से करते हैं. (फोटो एआई)
 

5.हनुमान मंदिर में दीपदान और हनुमान चालीसा क्यों पढ़ी जाती है?

हनुमान मंदिर में दीपदान और हनुमान चालीसा क्यों पढ़ी जाती है?
5

ज्योतिष मान्यताओं में कहा जाता है कि हनुमान जी की पूजा से शनि के कष्ट कम होते हैं. यही वजह है कि शनि जयंती और अमावस्या की शाम हनुमान मंदिर में दीपदान और हनुमान चालीसा का पाठ बेहद प्रभावशाली माना जाता है.

उपाय कैसे करें?
हनुमान मंदिर में जाकर घी या तेल का दीपक जलाएं और शांत मन से हनुमान चालीसा पढ़ें. जल्दबाजी में पाठ करने की बजाय ध्यान और श्रद्धा से पढ़ना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है.

इससे क्या लाभ माना जाता है?
मान्यता है कि इससे डर, मानसिक तनाव और नकारात्मक सोच कम होती है. कई लोग इसे आत्मविश्वास बढ़ाने और अचानक आने वाली बाधाओं से राहत देने वाला उपाय भी मानते हैं. (फोटो एआई)
 

6.शनि जयंती और अमावस्या पर ये उपाय ज्यादा असरदार क्यों माने जाते हैं?

शनि जयंती और अमावस्या पर ये उपाय ज्यादा असरदार क्यों माने जाते हैं?
6

ज्योतिष में अमावस्या को ऊर्जा परिवर्तन और आत्मचिंतन का समय माना जाता है, जबकि शनि जयंती शनि देव की उपासना का विशेष दिन है. जब ये दोनों संयोग साथ आते हैं तो इसे कर्म, मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन से जोड़कर देखा जाता है.

एक दिलचस्प बात यह भी है कि ऐसे उपाय सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहते. कई लोग मानते हैं कि नियमित पूजा, दीपदान और ध्यान जैसी गतिविधियां मानसिक तनाव कम करने और व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाने में भी मदद करती हैं. यही वजह है कि कठिन दौर से गुजर रहे लोग इन उपायों में भावनात्मक सहारा भी महसूस करते हैं. (फोटो एआई)
 

7.साढ़ेसाती और ढैय्या वालों के लिए क्यों खास है यह समय?

साढ़ेसाती और ढैय्या वालों के लिए क्यों खास है यह समय?
7

जिन लोगों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही होती है, उन्हें अक्सर देरी, संघर्ष, मानसिक दबाव या आर्थिक उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है. ऐसे में शनि जयंती पर किए गए उपायों को धैर्य, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला माना जाता है.

हालांकि ज्योतिषाचार्य यह भी कहते हैं कि केवल उपाय ही नहीं, बल्कि कर्म, व्यवहार और अनुशासन भी शनि के प्रभाव को प्रभावित करते हैं. इसलिए इन उपायों के साथ संयम और सकारात्मक सोच रखना भी जरूरी माना जाता है. (फोटो एआई)

डिस्क्लेमर- यह जानकारी सामान्य ज्योतिष और ग्रह- नक्षत्रों  के आधार पर लिखी गई है. जरूरी नहीं की सबका अनुभव एक सा हो. ग्रहों और कुंडली से भी परिणाम बदल जाते हैं. अधिक जानकारी के लिए ज्योतिषाचार्य से संपर्क करें

 अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगलफेसबुकx,   इंस्टाग्रामयूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.

Advertisement
Advertisement
Advertisement