Advertisement

Navratri 2nd Day: नवरात्रि के दूसरे दिन करें देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें पूजा विधि, बीज मंत्र से लेकर आरती तक और मंत्र

आज 23 सितंबर है औज नवरात्रि का दूसरा दिन है. इस दिन देवी के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाएगी. अपनी तपस्या के कारण ही देवी का नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा. जानिए ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा विधि, मंत्र और आरती और भोग से जुड़ी सारी जानकारी.

Latest News
Navratri 2nd Day: नवरात्रि के दूसरे दिन करें देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें पूजा विधि, बीज मंत्र से लेकर आरती तक और मंत्र

देवी ब्रह्मचारिणी 

Add DNA as a Preferred Source

नवरात्रि के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी के स्वरूप की पूजा की जाती है. देवी का नाम ही उनकी शक्ति को प्रकट करता है. ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है उसे करने वाली. इसीलिए हम ब्रह्मचारिणी को बार-बार नमन करते हैं. देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा से आत्मविश्वास, दीर्घायु, स्वास्थ्य, सौभाग्य, निर्भयता आदि की प्राप्ति होती है. माँ ब्रह्मचारिणी को ब्राह्मी भी कहा जाता है. इस देवी की पूजा करने से व्यक्ति कभी अपने लक्ष्य से विचलित नहीं होता और सही मार्ग पर चलता रहता है. जानिए नवरात्रि के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा कैसे करें, मंत्र और महत्व

ब्रह्मचारिणी नाम कैसे पड़ा?
शास्त्रों के अनुसार, देवी ने राजा पार्वती की पुत्री पार्वती के रूप में जन्म लिया था और महर्षि नारद की सलाह पर उन्होंने भगवान महादेव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए अपने जीवन में कठोर तपस्या की थी. हजारों वर्षों की कठोर तपस्या के कारण उन्हें तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी नाम प्राप्त हुआ. इस तपस्या के दौरान उन्होंने कई वर्षों तक उपवास और कठोर तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था. देवी के इस रूप की पूजा उनकी तपस्या के प्रतीक के रूप में की जाती है.
  
ब्रह्मचारिणी नवदुर्गा देवियों में द्वितीय हैं. नवरात्रि के दूसरे दिन इनकी पूजा की जाती है. यह देवी ब्रह्मांड के समस्त चेतन और अचेतन ज्ञान की ज्ञाता मानी जाती हैं. इनका स्वरूप श्वेत वस्त्र में लिपटी हुई कन्या के समान है, जिनके एक हाथ में अष्टदल की माला और दूसरे हाथ में कमंडल है. अक्षयमाला और जल का कलश धारण किए हुए, यह देवी ब्रह्मचारिणी कहलाती हैं. इन्हें शास्त्रों, निगमागम, तंत्र, मंत्र आदि का ज्ञान है. ब्रह्मचारिणी का स्वरूप सरल और राजसी है. अन्य देवियों की तुलना में ये अत्यंत सौम्य, क्रोधरहित और शीघ्र वरदान देने वाली हैं.

देवी ब्रह्मतारिणी की पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर देवी की पूजा करें. पूजा करते समय पीले वस्त्र धारण करें और देवी को पीली वस्तुएँ अर्पित करें. विधिवत पूजा करने के बाद, देवी को पीले फल, फूल आदि अर्पित करें. देवी को दूध से बने पदार्थ या चीनी का भोग लगाएँ. फिर देवी के मंत्रों का जाप करें. फिर घी का दीपक जलाकर आरती करें.

देवी ब्रह्मचारिणी को चढ़ाएं ये चीजें
नवरात्रि के दूसरे दिन देवी को चीनी का भोग लगाने की प्रथा है. ऐसा कहा जाता है कि देवी को चीनी का भोग लगाने से लंबी आयु, अच्छा स्वास्थ्य और सकारात्मक विचार प्राप्त होते हैं.

देवी ब्रह्माचारिणी की आरती

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता. 
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता. 
ब्रह्मा जी के मन भाती हो. 
ज्ञान सभी को सिखलाती हो. 
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा. 
जिसको जपे सकल संसारा. 
जय गायत्री वेद की माता. 
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता. 
कमी कोई रहने न पाए. 
कोई भी दुख सहने न पाए. 
उसकी विरति रहे ठिकाने. 
जो तेरी महिमा को जाने. 
रुद्राक्ष की माला ले कर. 
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर. 
आलस छोड़ करे गुणगाना. 
मां तुम उसको सुख पहुंचाना. 
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम. 
पूर्ण करो सब मेरे काम. 
भक्त तेरे चरणों का पुजारी.
 रखना लाज मेरी महतारी.
 
मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः या देवी सर्वभूतेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

मां ब्रह्मचारिणी व्रत कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी ने अपने पूर्व जन्म में पार्वती के रूप में जन्म लिया था. उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए बेहद कठोर तपस्या की और केवल फल-फूल खाकर जीवित रहीं. कभी-कभी तो वे पत्तों का भोजन करती थीं. उनकी तपस्या इतनी कठोर थी कि उन्हें "ब्रह्मचारिणी" नाम से जाना गया. माता पार्वती ने अपनी निष्ठा और तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न किया और अंततः उन्हें पति रूप में प्राप्त किया.

Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.

अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगलफेसबुकx,   इंस्टाग्रामयूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.

    Read More
    Advertisement
    Advertisement
    Advertisement