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Parivartini Ekadashi: आज या कल किस दिन रखा जाएगा परिवर्तिनी एकादशी का व्रत? जान लें पूजा का सटीक शुभ मुहूर्त 

परिवर्तिनी एकादशी के दिन कई शुभ योग बन रहे हैं. इस योग में लक्ष्मी नारायण की पूजा करने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है. चलिए जान लें कि परिवर्तिनी एकादशी किस दिन होगी और इसका शुभ मुहूर्त क्या है.

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Parivartini Ekadashi: आज या कल किस दिन रखा जाएगा परिवर्तिनी एकादशी का व्रत? जान लें पूजा का सटीक शुभ मुहूर्त 

सितंबर में परिवर्तिनी एकादशी का व्रत किस दिन रखा जाएगा?

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सनातन धर्म में भाद्रपद माह का विशेष महत्व है. इस दिन भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है. शुक्ल पक्ष में राधा रानी का अवतरण दिवस मनाया जाता है. साथ ही, भाद्रपद माह में गणेशोत्सव भी मनाया जाता है. भाद्रपद माह में कई बड़े व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं. भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी या जलझूलनी एकादशी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. जानें कब है परिवर्तिनी एकादशी.

परिवर्तिनी एकादशी कब है?
पंचांग के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी तिथि बुधवार, 3 सितंबर को प्रातः 3.53 बजे से प्रारम्भ होकर गुरुवार, 4 सितंबर को प्रातः 4.21 बजे समाप्त होगी. उदयातिथि के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत बुधवार, 3 सितंबर को रखा जाएगा.
 
परिवर्तिनी एकादशी पूजा विधि
परिवर्तिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए. एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर उनकी पूजा करें. फिर साफ कपड़े पहनकर उनकी पूजा करें. किसी चौराहे या रास्ते पर विष्णु जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. फिर पीले फूल, तुलसी के पत्ते, चावल, रोली, चंदन और मिठाई या फल का भोग लगाएं. साथ ही परिवर्तिनी व्रत की कथा सुनें या पढ़ें. फिर विष्णु जी की आरती और मंत्रों का जाप करें. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है. फिर अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को कुछ चीजें दान करें. इस दिन अन्न, वस्त्र या धन का दान करना पुण्य कर्म माना जाता है.
 
परिवर्तिनी एकादशी का महत्व
जो व्यक्ति परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखता है उसे अनेक लाभ प्राप्त होते हैं. शास्त्रों में इस व्रत को बहुत महत्व दिया गया है. ऐसी मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है तो उसके द्वारा जाने-अनजाने में किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस व्रत को करने से व्यक्ति के घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन में सौभाग्य की वृद्धि होती है. इसलिए यह व्रत बहुत लाभकारी माना जाता है. जो भक्त इस व्रत को श्रद्धा और विश्वास के साथ करते हैं उन्हें एक हजार अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है. इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ वामन अवतार की भी पूजा की जाती है. मान्यता के अनुसार वामन की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन के सभी दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं.

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