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Putrada Ekadashi 2022 : सावन की पुत्रदा एकादशी पर करें विष्णु सहस्रनाम का पाठ, जानें नियम और महत्व

Putrada Ekadashi 2022: हर माह एकादशी तिथि के दिन भगवान विष्णु की विशेष आराधना की जाती है. सावन मास में 8 अगस्त को एकादशी व्रत रखा जाएगा. इस दिन पुत्रदा एकादशी के रूप में जाना जाता है. मान्यता है कि इस दिन विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं.

Putrada Ekadashi 2022 : सावन की पुत्रदा एकादशी पर करें विष्णु सहस्रनाम का पाठ, जानें नियम और महत्व

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डीएनए हिंदी: Vishnu Sahasranamam Stotra- भगवान विष्णु को सृष्टि के पालनहार के रूप में जाना जाता है. मान्यता है कि उनकी आराधना करने से व्यक्ति के सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं. हर माह एकादशी तिथि के दिन भगवान विष्णु की विशेष आराधना की जाती है. सावन मास में 8 अगस्त को एकादशी व्रत रखा जाएगा. इस दिन पुत्रदा एकादशी के रूप में जाना जाता है. शास्त्रों के अनुसार पुत्रदा एकादशी व्रत (Putrada Ekadashi 2022) रखने से संतान की प्राप्ति होती है और उनका जीवन अधिक सुखमय बन जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा के साथ विष्णु सहस्त्रनाम का भी पाठ किया जाता है. मान्यता है कि विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं. आइए जानते हैं, क्या है भगवान विष्णु (Lord Vishnu) सहस्रनाम पाठ का महत्व...

विष्णु सहस्रनाम पाठ के नियम (Vishnu Sahasranamam Stotra Niyam)

  • बता दें कि भगवान विष्णु के सहस्रनाम का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है लेकिन सूर्योदय के समय इसे पढ़ना उत्तम माना जाता है. 

  • विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करते समय इस बात का ध्यान रखें कि मंदिर में जल से भरा कलश अथवा गिलास रख लें. इस कलश पर नारियल और आम का पत्ता रख लें. माना जाता है कि जल के बिना यह पाठ सफल नहीं होता है. 

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  • इसके साथ वस्त्र का खास ध्यान रखें. सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करते समय पीला वस्त्र धारण करें. पीला रंग भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है. इसके साथ माता लक्ष्मी की कृपा भी आप पर बनी रहती है. 

विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का महत्व (Vishnu Sahasranamam Stotra Importance)

इस स्तोत्र में भगवान विष्णु के हजार नामों का उल्लेख किया गया है. यही कारण है कि इस स्तोत्र के पाठ से व्यक्ति कई प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता है. मान्यता यह भी है कि ऐसा करने से भय और तनाव से मुक्ति मिलती है. साथ ही धन कमाने के नए रास्ते भी खुल जाते हैं. इस स्तोत्र का शुद्ध उच्चारण करने से सभी ग्रह नक्षत्र नियंत्रण में आ जाते हैं और जातकों की कुंडली से कई दोष भी दूर हो जाते हैं. 

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.) 

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