धर्म
Parikrama Importance: मान्यता है कि भगवान की परिक्रमा करने से सभी कष्ट, पाप व दुख दूर हो जाते हैं.
डीएनए हिंदी: जब भी हम मंदिर जाते हैं तो वहां परिक्रमा (Parikrama Importance) जरूर करते हैं. हिंदू धर्म में परिक्रमा को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. वैदिक ग्रंथ ऋग्वेद में भी प्रदक्षिणा या परिक्रमा का जिक्र किया गया है. बता दें कि देवी देवताओं की, पीपल या वट वृक्ष की, तुलसी की, यज्ञ और नदी इत्यादि की परिक्रमा जरूर की जाती है. वह इसलिए क्योंकि प्रकृति के इन सभी चीजों को साक्षात देवताओं का स्थान प्राप्त है.
मान्यता है कि भगवान की परिक्रमा करने से सभी कष्ट, पाप व दुख दूर हो जाते हैं. इसलिए लोग प्रत्यक्ष देवता सूर्य देव को भी जल अर्पित करने के बाद उनकी परिक्रमा करते है. साथ ही धर्म शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि मंदिर और भगवान की परिक्रमा करने से सकारात्मकता हमारे शरीर में और भाग्य में प्रवेश करती हैं. आइए जानते हैं क्या है परिक्रमा के नियम और इसके लाभ.
धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि परिक्रमा को हमेशा भगवान के दाएं हाथ की तरफ से शुरू करना चाहिए. यानी हमें घड़ी की सुई की दिशा में चलना चाहिए. इसके साथ यह भी बताया गया है की परिक्रमा करते समय आपस में बात नहीं करनी चाहिए बल्कि मंत्र उच्चारण और भगवान का ध्यान करना चाहिए.
परिक्रमा के धार्मिक एवं वैज्ञानिक कारण दोनों हैं. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो माना यह जाता है कि जिन जगहों पर पूजा या मंत्र उच्चारण होता है वहां सकारात्मक ऊर्जा रहती है. ऐसे में इस ऊर्जा में जब व्यक्ति प्रवेश करता है तो उसे आत्मिक शांति मिलती है और उसका आत्मबल दृढ़ होता है.
धार्मिक दृष्टिकोण से देखें तो परिक्रमा करने से बहुत फायदा मिलता है. इससे व्यक्ति को भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उसे धन-धान्य, सुख, समृद्धि प्राप्त होती है. इसके साथ परिक्रमा के दौरान अपने इष्ट देवता को ध्यान करने से और उनके मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति को बहुत लाभ मिलता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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