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Kamada Ekadashi 2022: भगवान विष्णु का व्रत रखने से पूर्ण होंगी सभी मनोकामनाएं, जानिए इस व्रत का महत्व और पूजा विधि

12 अप्रैल को कामदा एकादशी व्रत रखा जाएगा, जानिए इस व्रत का महत्व और पूजा विधि.

Kamada Ekadashi 2022: भगवान विष्णु का व्रत रखने से पूर्ण होंगी सभी मनोकामनाएं, जानिए इस व्रत का महत्व और पूजा विधि

कामदा एकादशी 2022

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डीएनए हिंदी: 12 अप्रैल को कामदा एकादशी (Kamada Ekadashi 2022) है. मान्यता है कि इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा करने और कामदा एकादशी व्रत कथा का पाठ करने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है. साथ ही उनके हर दुख-कष्ट भी दूर हो जाते हैं. पञ्चाङ्ग (Hindu Calendar) के अनुसार, यह व्रत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी 12 अप्रैल को सुबह 04:30 बजे शुरू होगा और 13 अप्रैल सुबह 05:02 बजे इसका सम्पन्न हो जाएगा. सुबह 05:59 बजे से लेकर सुबह 08:35 बजे तक सर्वार्थ ​सिद्धि योग है. इसलिए आप प्रात: ही स्नान-ध्यान करके कामदा एकादशी व्रत की पूजा आरंभ कर सकते हैं. आइए जानते हैं कामदा एकादशी व्रत की पूजा विधि के विषय में.

कामदा एकादशी पूजा विधि

  • प्रात: स्नान करने के बाद साफ कपड़ा पहनें. फिर पूजा घर की अच्छे से साफ-सफाई कर एक चौकी स्थापित करें.

  • चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं और भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. 

  • हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर कामदा एकादशी व्रत का संकल्प जरूर लें.

  • अब दूध, दही, शक्कर, घी और शहद से बनें पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक करें. उनको पीले फूल, फल, तुलसी का पत्ता, केला, अक्षत्, धूप, सुपारी, पान, चंदन, दीप, गंध आदि अर्पित करें. इस दौरान 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप निरंतर करते रहें.

  • अब विष्णु चालीसा, विष्णु सहस्रनाम और कामदा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें. सबसे अंत में भगवान विष्णु की आरती जरूर करें और सभी कष्टों से निवारण के लिए श्रीहरी से प्रार्थना करें.

  • सामर्थ्य अनुसार ब्राह्मण को अनाज, केला, पीले वस्त्र, फल, मिठाई आदि दान अवश्य करें.

  • शाम के समय में आरती करें और हो सके तो रात्रि के समय भगवान विष्णु का जागरण करें.

  • अगली सुबह स्नान के बाद पुनः भगवान विष्णु की आराधना करें.

  • दोपहर 01:39 बजे के बाद व्रत का सम्पन्न कर दें. 

  • बता दें कि व्रत का पारण शाम 04:12 बजे तक कर लेना है. इस व्रत को शुद्ध मन से पूर्ण करने से राक्षस योनि से मुक्ति प्राप्त होती है और पाप-कष्ट मिट जाते हैं.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.) 

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