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अफ्रीका में मिला 'मास्क' और ऑरेंज लिप्स वाला अनोखा बंदर, इनकी दहाड़ और फुंफकार से वैज्ञानिक भी हैरान!

अफ्रीका के घने जंगलों में वैज्ञानिकों ने बंदर की एक बेहद खास प्रजाति को ढूंढ निकाला है. ये बंदर दहाड़ने और फुंफकारने जैसी आवाजें निकालते हैं और इनका चेहरा ऐसा दिखता है, मानो इन्होंने मुखौटा पहना हो. जानें इस अनोखे जीव की खास बातें...

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अफ्रीका में मिला 'मास्क' और ऑरेंज लिप्स वाला अनोखा बंदर, इनकी दहाड़ और फुंफकार से वैज्ञानिक भी हैरान!

अफ्रीका के घने जंगलों में मिला अनोखा बंदर Colobus congoensis. (Image Credit: Frankfurt Zoological Society)

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  • अफ्रीका के घने जंगलों में मिली बंदरों की नई प्रजाति
  • चेहरे पर मास्क जैसे पैटर्न और नारंगी होते हैं इनके होंठ
  • वैज्ञानिकों ने Colobus congoensis रखा नाम
  • दहाड़ और फु्ंफकारने जैसी आवाजों ने वैज्ञानिकों को किया हैरान

अफ्रीका के घने जंगलों में वैज्ञानिकों को बंदरों की एक ऐसी नई प्रजाति मिली है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है. इस बंदर की खास पहचान इसके चमकीले नारंगी होंठ, चेहरे पर मुखौटे जैसा पैटर्न और शेर जैसी गूंजती दहाड़ के साथ फुफकार जैसी आवाजें हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज इस बात का संकेत देती है कि कांगो के विशाल वर्षावनों में जानवरों की अभी और भी ऐसी प्रजातियां छिपी हो सकती हैं जिनसे दुनिया अनजान है.

अफ्रीका में कहां पाया गया Colobus congoensis?

वैज्ञानिकों ने इस नई प्रजाति का नाम Colobus congoensis रखा है. स्थानीय लोग इस बंदर को लिकवेली नाम से जानते हैं. यह बंदर अफ्रीका के डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में लोमामी नेशनल पार्क और उसके आसपास के घने जंगलों में पाया गया है. इस खोज से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि आज के समय में किसी बड़ी प्राइमेट प्रजाति की नई पहचान होना बेहद दुर्लभ है. द फॉरेस्ट कलेक्टिव के को-फाउंडर और एंथ्रोपोलॉजिस्ट जोशुआ लिंडर के मुताबिक, आज के आधुनिक समय में बंदर की ऐसी प्रजाति का मिलना, जिसका पहले से कोई रिकॉर्ड न हो, एक बड़ी उपलब्धि है. 

Colobus congoensis के खोज की कहानी

इस रहस्यमयी बंदर की कहानी साल 2008 में शुरू हुई थी. एक कन्जर्वेशन प्रोजेक्ट के दौरान लोमामी नेशनल पार्क में एक बंदर की धुंधली तस्वीर कैमरे में कैद हुई थी लेकिन उसकी पहचान नहीं हो पाई. इसके बाद साल 2018 में भी वैसा ही बंदर कैमरे में कैद हुआ. इन तस्वीरों ने अटलांटिक यूनिवर्सिटी के एंथ्रोपोलॉजिस्ट जूनियर अंबोको और उनकी टीम को इस रहस्यमयी प्रजाति की खोज के लिए प्रेरित किया. रिसर्चर्स ने इस पार्क के आसपास बसे 52 गांवों के लोगों को अलग-अलग बंदरों की तस्वीरें दिखाईं. इनमें से 8 गांव के लोगों ने इसे पहचान लिया और बताया कि वे इसे लिकवेली नाम से जानते हैं.

प्रजाति का नाम

स्थानीय नाम

खोज का स्थान

शारीरिक विशेषताएं

आवाज की विशेषता

खोज का वर्ष

अनुमानित वजन

 

Colobus congoensis

लिकवेली (Likweli) या कसाबा नकोनी (Kasaba Nkoni)

लोमामी नेशनल पार्क और लुआलाबा नदियों के बीच, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो

चमकदार काला शरीर, मुंह-नाक के पास नारंगी-भूरे रंग की त्वचा, नारंगी होंठ, चेहरे पर मुखौटे जैसा पैटर्न, पूंछ और कूल्हों के पास सफेद धब्बा

शेर जैसी गूंजती दहाड़ और बीच-बीच में तेज फुफकार जैसी ध्वनि

2008 (प्रथम दर्शन), 2018 (पुष्टि)

7 किलो

 

Colobus congoensis को कितना जानता है स्थानीय समुदाय?

वहीं, कुछ समुदाय इसे कसाबा नकोनी भी कहते हैं, जिसका मतलब है  'शाखाओं को हिलाने वाला'. यह नाम पेड़ों की डालियों पर इसकी तेज छलांग लगाने की वजह से पड़ा. इसके बाद साल 2018 से 2022 के बीच वैज्ञानिकों ने लोमामी और लुआलाबा नदियों के बीच लगभग 1,700 वर्ग किलोमीटर के इलाके में इस प्रजाति को 114 बार देखा. इसके आधार पर उन्होंने इसकी आबादी, व्यवहार और रहन-सहन की स्टडी की जिसके नतीजे 15 जुलाई को साइंस के मशहूर जर्नल PLOS ONE में छपे.

Colobus congoensis की कौन-सी चीज दूसरे बंदरों से अलग बनाती है?

इस बंदर का शरीर चमकदार काले रंग का होता है. इनके मुंह और नाक के आसपास चिकनी नारंगी-भूरे रंग की त्वचा होती है. वहीं, इनके होंठ नारंगी रंग के होता है. गालों के आसपास का रंग ऐसा लगता है जैसे इन्होंने अपने चेहरे पर कोई मुखौटा पहना हो. इसके अलावा इनकी पूंछ और कूल्हों के आसपास सफेद बालों का धब्बा होता है. इस प्रजाति की खासियत इसकी आवाज भी है. 7 किलो वजन वाले ये बंदर गहरी और दूर तक सुनाई देने वाली दहाड़ जैसी आवाज निकालते हैं. इन आवाजों के बीच-बीच में तेज फुफकार जैसी ध्वनि भी सुनाई देती है.

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