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Dvorak Technique: कैसे मिलती है चक्रवात आने से पहले की सूचना? जानिए इसकी तकनीक

What is Dvorak Technique: मौसम वैज्ञानिक Vernon Dvorak की तरफ से इजाद की गई तकनीक भले ही 50 साल पुरानी है लेकिन इससे लाखों लोगों की जान बचाई गई.

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Dvorak Technique: कैसे मिलती है चक्रवात आने से पहले की सूचना? जानिए इसकी तकनीक

How to get information about the arrival of cyclone : कैसे मिलती है चक्रवात आने की सूचना

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डीएनए हिंदी: What is Dvorak Technique: वर्नोन ड्वोरक (Vernon Dvorak) का बीते दिनों निधन हो गया था. अपनी जिंदगी में 100 सावन देख चुके वर्नोन ड्वोरक ने मानवता की भलाई के लिए जो तकनीक इजाद की थी, उसके लिए दुनिया उनकी हमेशा आभारी रहेगी. उन्नत तकनीक, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के युग में भी 50 साल पहले वर्नोन ड्वोरक ने चक्रवात के आने की पूर्व सूचना के मद्देनजर जो तकनीक तैयार की उस पर आज भी भरोसा किया जाता है. 

ड्वोरक तकनीक क्या है? (What is Dvorak Technique?)

इस तकनीक को पहली बार 1969 में विकसित किया गया था और उत्तर पश्चिमी प्रशांत महासागर में तूफानों को देखने के लिए इसका परीक्षण किया गया था. चक्रवात के आने पहले की सूचना का पता लगाने के लिए उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclone) जैसे कि - तूफान, चक्रवात और टाइफून की विशेषताओं की जांच के लिए पोलर सेटेलाइट से हासिल की गई तस्वीरों का इस्तेमाल किया था. चक्रवात का पता लगाने के लिए दिन में स्पेक्ट्रम की तस्वीरों का उपयोग किया जाता था, जबकि रात में समुद्र की तस्वीरों का उपयोग करके देखा जाता था.

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Dvorak technique - Wikipedia

इस तकनीक को मौसम संबंधी इनोवेशन में बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है. यह तकनीक अपने इजाद के बाद कई डेवलपमेंट से होकर से गुजरी है. विशेषज्ञों का दावा है कि यह तकनीक चक्रवात की तीव्रता का अनुमान लगाने के लिए एक गाइड है - जो स्थानीय प्रशासन के लिए तटीय या अन्य आस-पास के निवासियों को सही समय पर वहां से निकाल कर सुरक्षित जगह पहुंचाने में मदद करता है.

भारतीय मौसम वैज्ञानिकों का दावा है कि इस तकनीक का इस्तेमाल कर हासिल की गई तस्वीरों से तूफान संरचना और उसके पैटर्न का पहचान किया जा सकता है. साथ ही ड्वोरक तकनीक चक्रवात की तीव्रता का अनुमान लगाने में मदद करती है.

वर्नोन ड्वोरक कौन थे? (Who was Vernon Dvorak?)

वर्नोन ड्वोरक एक अमेरिकी मौसम विज्ञानी थे, जिन्हें 1970 के दशक की शुरुआत में ड्वोरक तकनीक विकसित करने का श्रेय दिया जाता है. तब से इस तकनीक को कई बार अपग्रेड किया गया है, और इस साल मई में हाल ही में एक सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद इसे एडवांस्ड ड्वोरक तकनीक (ADT) नाम दिया गया. जिसे नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के नेशनल हरिकेन सेंटर की तरफ से बनाया गया है.

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ड्वोरक तकनीक, जिसे सबसे महान मौसम संबंधी नवाचारों में से एक कहा जाता है, अपने इजाद के बाद से कई डेवलपमेंट से गुजरा है. मौजूदा वक्त में जब मौसम या चक्रवात का पूर्वानुमान हासिल करने की उन्नत तकनीक जैसे - एनिमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और सेटेलाइट टेकनीक जैसी चीजें मौजूद हैं, वहां यह 50 साल पुरानी तकनीक ने समय समय पर दुनिया भर में लाखों लोगों की जान बचाई है.

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