साइंस
Jaya Pandey | Aug 24, 2026, 03:25 PM IST
1.दुनिया का सबसे छोटा बंदर

प्रकृति बेहद अनोखी है और इसमें पाए जाने वाले सभी जीव-जंतु भी अपने आप में खास हैं. आज हम आपको दुनिया के सबसे छोटे बंदर से मिलवाएंगे, जिसका आकार इतना छोटा है कि वह आपकी हथेली में भी समा सकता है. इस बंदर का नाम Pygmy marmoset है, जो दक्षिण अमेरिका के घने वर्षावनों में पाया जाता है.
(All Image Credit: Wikimedia Commons)
2. 100 से 125 ग्राम के बीच होता है Pygmy marmoset का वजन

इस बंदर का वजन महज 100 से 125 ग्राम के बीच होता है और इनकी लंबाई सिर्फ 2 से 15 सेंटीमीटर होती है. यह प्राइमेट पेरू, इक्वाडोर, कोलंबिया, बोलीविया और ब्राजील के नदी किनारे फैले अमेजन रेनफॉरेस्ट में पाया जाता है और इसकी अनुकूलन क्षमता भी गजब की होती है. विस्कॉन्सिन नेशनल प्राइमेट रिसर्च सेंटर के मुताबिक, नर और मादा का आकार लगभग एक समान होता है लेकिन मादा नर से थोड़ी भारी हो सकती हैं.
3.Pygmy marmoset की शारीरिक संरचना कैसी होती है?

पिग्मी मार्मोसेट का शरीर भूरे-सुनहरे रंग के बालों से भरा होता है और इसकी पीठ पर काली धारियां मौजूद होती हैं. इनके पूंछ लंबे होते हैं तो छलांग लगाते समय संतुलन बनाने में मददगार साबित होते हैं. भले ही यह जीव देखने में नाजुक लगे लेकिन इसके नुकीले पंजे इसे पेड़ की छाल को मजबूती से पकड़ने में सक्षम बनाते हैं. यह पेड़ों की शाखाओं से 16 फीट लंबी छलांग लगा सकता है.
4.Pygmy marmoset का आहार क्या है?

पिग्मी मार्मोसेट के नवजात बच्चे हल्के चमकीले पीले रंग के होते हैं. पैदा होने के एक महीने के अंदर ही इनका रंग व्यस्कों जैसा हो जाता है. ये बंदर एक्सुडेटिवोर होते हैं और इनके आहार का 80 प्रतिशत हिस्सा पेड़ों का रस, गोंद और रेजिन होता है. इनके नीचे के दांत लंबे और धारीदार होते हैं और ये पेड़ की छाल में छेद करके उसका रस निकालते हैं. इसके अलावा ये भृंग, टिड्डे, मकड़ियां, फल और फूल भी खाते हैं.
5.ग्रुप में रहते हैं और पूरा परिवार मिलकर करता है बच्चों की देखभाल

ये प्राइमेट्स 2 से 9 सदस्यों के ग्रुप में रहते हैं. इसमें एक कपल और उनके बच्चे होते हैं. प्राइमेट्स की दुनिया में यह बेहद दुर्लभ बात है कि इनमें आमतौर पर जुड़वां बच्चे पैदा होते हैं और पूरा परिवार मिलकर उनके पालन-पोषण में मदद करता है. रात के समय ये बाज, सांप और जंगली बिल्लियों जैसे शिकारियों से बचने के लिए पेड़ों के खोखले तनों या घनी लताओं में छिप जाते हैं. खतरा होने पर ये पूरी तरह स्थिर हो जाते हैं या समूह बनाकर तेज आवाज निकालते हैं.