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हिमालय के ऊपर उड़ते समय पायलटों को तीन सूर्य क्यों दिखाई देते हैं? समझें इसके पीछे का साइंस

हिमालय के ऊपर से उड़ने वाले पायलट अक्सर तीन सूर्य को देखने की बात करते हैं, समझें कि आखिर यह भ्रम है या इसके पीछे कोई साइंस छिपा हुआ है...

Jaya Pandey | Mar 04, 2026, 03:51 PM IST

1.हिमालय के ऊपर पायलटों को क्यों दिखते हैं 3 सूर्य?

हिमालय के ऊपर पायलटों को क्यों दिखते हैं 3 सूर्य?
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ऊंचे हिमालय पर्वत के ऊपर दिल्ली से काठमांडू या दूसरी ऊंचाई वाले रास्ते पर जाने वाले विमान के पायलट अक्सर एक ही समय में आकाश में तीन सूर्यों को देखने की बात कहते हैं. यह कॉकपिट प्रतिबिंबों के कारण उत्पन्न कोई प्रकाशीय भ्रम नहीं है बल्कि एक वायुमंडलीय घटना है जिसे सनडॉग या पेरिहेलियन के नाम से जाना जाता है.

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2.सनडॉग्स के पीछे का विज्ञान

सनडॉग्स के पीछे का विज्ञान
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पेरिहेलियन तब होता है जब सूर्य की रोशनी सिरोस्ट्रेटस बादलों में क्षैतिज रूप से संरेखित, षट्कोणीय प्लेट-जैसे बर्फ के क्रिस्टल के माध्यम से अपवर्तित होती है, जो पतले, ज्यादा ऊंचाई वाले, बर्फ के क्रिस्टल से बने चादर जैसे बादल होते हैं और पूरे आकाश को ढक सकते हैं.

3.मून डॉग किसे कहते हैं?

मून डॉग किसे कहते हैं?
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6,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर सिरोस्ट्रेटस बादल एक पतले, पारदर्शी आवरण की तरह दिखाई देते हैं, जो अक्सर सूर्य या चंद्रमा के चारों ओर एक प्रभामंडल बनाते हैं. जब बर्फ के क्रिस्टल चंद्रमा के चारों ओर चमकीले धब्बे बनाते हैं तो इस घटना को मून डॉग कहा जाता है. ये बर्फ के क्रिस्टल प्रिज्म की तरह काम करते हैं और सूर्य की रोशनी को कम से कम 22 डिग्री तक मोड़ देते हैं जिससे सूर्य के दोनों ओर समान ऊंचाई पर चमकीले धब्बे बन जाते हैं.

4.एक सूर्य के साथ दिखते हैं दो और सूर्य

एक सूर्य के साथ दिखते हैं दो और सूर्य
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जब क्रिस्टल बड़े और पूरी तरह से दिशाबद्ध होते हैं तो सनडॉग के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो जाती हैं जिससे चमकीले क्षेत्र दो सूर्य जैसी संरचना दिखाई देती है. परिणामस्वरूप असली सूर्य के साथ-साथ दो नकली सूर्य भी एक ही समय में आकाश में दिखाई देते हैं. जब सूर्य नीचे होता है तो ये रंगीन नकली सूर्य क्षितिज के पास देखे जा सकते हैं.

5.भ्रम नहीं, मौसमी घटना की वजह से ऐसा होता है

भ्रम नहीं, मौसमी घटना की वजह से ऐसा होता है
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30,000 से 42,000 फीट के बीच की उड़ान ऊंचाई पर विमान पहाड़ों के ऊपर ऑरोग्राफिक लिफ्ट द्वारा निर्मित लगातार सिरोस्ट्रेटस बादलों के बीच से या उनके ठीक नीचे से उड़ान भरते हैं. यह एक मौसमी घटना है जिसमें एक गतिशील वायुराशि किसी बड़े भौतिक अवरोध जैसे कि पहाड़ से टकराने पर ऊपर की ओर बढ़ने के लिए बाध्य होती है. 

6.नासा ने बताया इसके पीछे का साइंस

नासा ने बताया इसके पीछे का साइंस
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जब नम हवा पहाड़ों के ऊपर से ऊपर की ओर धकेली जाती है तो ऊंचाई पर वह ठंडी हो जाती है जिससे जलवाष्प बर्फ के क्रिस्टल में जम जाती है. इसी प्रकार सनडॉग के लिए उत्तरदायी सिरोस्ट्रेटस बादल बनते हैं. नासा के अनुसार हिमालय क्षेत्र पृथ्वी पर सुंदर सनडॉग देखने के लिए सबसे बढ़िया जगहों में से एक हैं क्योंकि यहां का ठंडा तापमान -40 से लेकर -60 डिग्री सेल्सियस तक होता है और भारतीय मानसून से प्रचुर मात्रा में नमी के साथ मिलकर सालभर आदर्श बर्फ के क्रिस्टल उत्पन्न होते हैं.

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