साइंस
Jaya Pandey | Jul 17, 2025, 02:17 PM IST
1.क्यों लौटने के बाद खड़े भी नहीं हो पाते हैं एस्ट्रोनॉट्स?

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की सैर कर धरती पर वापस लौट चुके हैं. आपने देखा होगा कि जब उनके स्पेसक्राफ्ट ने धरती पर लैंड किया तो उन्हें कैप्सूल के सहारे नीचे उतारा गया. इसके बाद उन्हें चलने में भी लोगों का सहारा लेना पड़ा. क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर एस्ट्रोनॉट्स अंतरिक्ष से वापसी के बाद चलना तो दूर ठीक से खड़े भी क्यों नहीं हो पाते हैं?
2.गुरुत्वाकर्षण क्यों एस्ट्रोनॉट्स के लिए बन जाता है विलेन?

धरती पर वापसी के बाद एस्ट्रोनॉट्स के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक पृथ्वी पर चलने में असमर्थता है. दरअसल ऐसा मानव शरीर पर सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण के प्रभावों के कारण होता है. ऐसे में आमतौर पर एस्ट्रोनॉट्स को स्ट्रेचर पर लिटाकर स्पेसक्राफ्ट से बाहर निकाला जाता है. वहीं कुछ एस्ट्रोनॉट्स पृथ्वी पर लौटने पर चक्कर और मतली का अनुभव कर सकते हैं.
3.अंतरिक्ष में शरीर के ये हिस्से हो जाते हैं कमजोर

पृथ्वी पर हमारी हड्डियां और मांसपेशियां हमारे शरीर को थामे रखने और गति को सक्षम करने के लिए लगातार गुरुत्वाकर्षण के विपरीत काम करती हैं. वहीं अंतरिक्ष में भारहीनता की स्थिति में यह प्रतिरोध काफी कम होता है. चूंकि वहां शरीर के वजन को उठाने की जरूरत नहीं होती इसलिए चलने में अहम भूमिका निभाने वाली पीठ के निचले हिस्से, जांघ और पिंडली की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और अपना द्रव्यमान खो देती हैं.
4.शरीर की हड्डियां तक खो देती है घनत्व

अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण में कंकाल सिस्टम स्वयं क्षतिग्रस्त हो जाती है और अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में हर महीने अपने अस्थि घनत्व का 1-2% तक खो देते हैं. इसके अलावा शरीर के द्रव का पुनर्वितरण भी अंतरिक्ष यात्रियों की कठिनाई की वजह बनता है.
5.शरीर के ऊपरी हिस्से में जमा होने लगता है खून

अंतरिक्ष में रक्त और द्रव शरीर के ऊपरी हिस्से की ओर ट्रांसफर हो जाते हैं. पृथ्वी पर लौटने पर अंतरिक्ष यात्रियों को खड़े होने पर बल्ड प्रेशर में अचानक गिरावट के कारण चक्कर आना या बेहोशी का अनुभव हो सकता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि शरीर को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के तहत ब्लड सर्कुलेशन को नियंत्रित करने की अपनी क्षमता को फिर से तैयार करने के लिए समय चाहिए.
6.धरती पर वापसी के बाद एस्ट्रोनॉट्स को आती हैं ये मुश्किलें

इतना ही नहीं पृथ्वी पर लौटने पर अंतरिक्ष यात्रियों को संतुलन बनाए रखने में कठिनाई हो सकती है क्योंकि उनका वेस्टिबुलर सिस्टम भारहीन वातावरण के अनुकूल हो चुका होता है. उनके दिमाग को अपने इंटरनल इयर से संकेतों को फिर से जांचने और सही ढंग से समझने में समय लगता है. उनके लिए अंतरिक्ष में जो गतिविधियां सहज थीं, वे अजीब हो जाती हैं क्योंकि दिमाग को गुरुत्वाकर्षण-निर्भर वातावरण में चलना फिरना सीखना पड़ता है.
7.धरती पर वापस लौटने पर एस्ट्रोनॉट्स को मिलती है खास ट्रेनिंग

पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के अभ्यस्त होने में मदद के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को धरती पर वापस लौटने पर ट्रेनिंग दी जाती है. वे मेडिकल टेस्ट से गुजरते हैं, जहां वे मांसपेशियों की शक्ति और हड्डियों के घनत्व को दोबारा हासिल करने के लिए एक्सरसाइज करते हैं. इसके अलावा उन्हें संतुलन बनाने की भी ट्रेनिंग दी जाती है, जो वेस्टिबुलर प्रणाली को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के अनुकूल बनाने में मदद करता है.
8.अंतरिक्ष में हृदय स्वास्थ्य सबसे ज्यादा होता है प्रभावित

चूंकि अंतरिक्ष में हृदय स्वास्थ्य सबसे अधिक प्रभावित होता है इसलिए हृदय और संचार प्रणाली की कार्यक्षमता को बहाल करने के लिए शारीरिक गतिविधियों को धीरे-धीरे फिर से शुरू किया जाता है.
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